न्यूज स्कैन ब्यूरो, नई दिल्ली
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सोमवार (5 जनवरी, 2026) को दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित IRCTC होटल घोटाले के मामले में लालू यादव द्वारा दायर याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी किया।
क्या है पूरा मामला?
लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट (राउज एवेन्यू कोर्ट) द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अक्टूबर 2025 में, विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव सहित 11 अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट में आज क्या हुआ?
CBI को नोटिस: न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए CBI से इस याचिका पर अपना पक्ष रखने को कहा है।
स्टे देने से इनकार: लालू यादव की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर तुरंत रोक (Stay) लगाने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि बिना जांच एजेंसी का जवाब सुने इस पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।
अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई अब 14 जनवरी, 2026 को होगी।
ट्रायल कोर्ट की सख्त टिप्पणी
गौरतलब है कि अक्टूबर में आरोप तय करते समय ट्रायल कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि यह मामला ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ (Crony Capitalism) का एक उदाहरण हो सकता है, जहां निजी भागीदारी के नाम पर सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग किया गया। CBI का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने रांची और पुरी के IRCTC होटलों के रखरखाव का ठेका निजी कंपनियों को देने के बदले कौड़ियों के दाम पर कीमती जमीनें अपने परिवार के नाम करवाई थीं।
परिवार की मुश्किलें बरकरार
इस मामले में लालू यादव के साथ-साथ बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी आरोपी हैं। हाईकोर्ट के इस नोटिस के बाद अब सबकी नजरें 14 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत तय करेगी कि निचली अदालत में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाई जाए या नहीं।


























