‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मंगलवार (24 मार्च 2026) को अदालत ने उनकी उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर और तीन चार्जशीट को रद्द करने की मांग की गई थी। इस फैसले के बाद अब लालू यादव और उनके परिवार पर नियमित मुकदमा (Trial) चलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। जानिए कि आगे क्या होगा…
न्यूज स्कैन ब्यूरो, नई दिल्ली
जानिए कि अदालत ने क्यों खारिज की याचिका?
लालू यादव की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत जांच शुरू करने से पहले सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य था। लेकिन जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने इस तर्क को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि, धारा 17A को साल 2018 में जोड़ा गया था, जबकि यह मामला 2004-2009 के बीच का है। कानून के इस प्रावधान को पुराने मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता।
आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ग्रुप-डी की नियुक्तियों के बदले जमीन लेना किसी रेल मंत्री के आधिकारिक कर्तव्यों के दायरे में नहीं आता, इसलिए उन्हें इस धारा के तहत कोई सुरक्षा नहीं दी जा सकती।
क्या है अगला कदम?
इस मामले में कानूनी घेरा केवल लालू यादव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा परिवार इसकी जद में है:
चार्ज फ्रेमिंग: जनवरी 2026 में ट्रायल कोर्ट ने पहले ही लालू, राबड़ी देवी, तेजस्वी और तेज प्रताप यादव सहित 40 से अधिक आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय कर दिए थे।
गवाहों की बारी: हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया तेज होगी।
राबड़ी देवी की याचिका: राबड़ी देवी ने उन 1,600 ‘गैर-भरोसेमंद’ (unrelied) दस्तावेजों की मांग की है जिन्हें सीबीआई ने जब्त तो किया लेकिन सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया। इस पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।
सियासी गलियारों में हलचल
2026 के चुनावी साल और बिहार की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच, यह फैसला आरजेडी के लिए एक बड़ी चुनौती है। जांच एजेंसियों (सीबीआई और ईडी) का दावा है कि इस घोटाले में करीब 600 करोड़ रुपये की ‘अपराध की कमाई’ (Proceeds of Crime) जुड़ी है। जहां लालू परिवार इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बता रहा है, वहीं अदालत के सख्त रुख ने उनके कानूनी बचाव के रास्तों को संकरा कर दिया है।
































