प्रदीप विद्रोही, भागलपुर
चंपारण की मिट्टी ने गांधी को जन्म दिया था, अब उसी धरती ने कला के जरिए राहुल-तेजस्वी का स्वागत किया है – वो भी एक पीपल के पत्ते पर!बिहार में इस समय राजनीति की सरगर्मी जितनी तेज है, उतनी ही तेज है कला की जुबान भी। महागठबंधन की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसे देखने-सुनने के साथ-साथ महसूस भी किया जा रहा है — और इसका सबसे अनोखा उदाहरण सामने आया है पूर्वी चंपारण से।
गुरुवार को यात्रा जब अपने 12वें दिन ढाका (पूर्वी चंपारण) पहुंची, तो स्वागत में बिछी कालीनों और नारों के बीच एक पीपल का पत्ता भी बोल उठा!
जब पत्ते ने कहा – “स्वागत है!”
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने इस बार मिट्टी नहीं, बल्कि हरा पीपल का पत्ता चुना। महज 3 सेंटीमीटर के उस छोटे से पत्ते पर उन्होंने 5 घंटे की मेहनत से उकेरीं दो बड़ी राजनीतिक हस्तियां – राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की अद्भुत तस्वीरें।
पत्ते के नीचे लिखा गया – “Welcome to Champaran” और साथ ही लिखा गया बिहार के कलाकारों का अदृश्य संदेश – “कला बोलती है, राजनीति सुनती है।”
कलाकार की सोच, भावों की अभिव्यक्ति
मधुरेंद्र ने बताया – “जब-जब बिहार की धरती पर कोई बड़ा मेहमान आता है, हम उनका स्वागत शब्दों से नहीं, कला से करते हैं। ये सिर्फ एक चित्र नहीं, चंपारण की आत्मा की अभिव्यक्ति है।” उन्होंने कहा, “गांधी जी ने चंपारण में सत्य की खेती की थी, आज हम उसी धरती पर रचनात्मकता की खेती कर रहे हैं।”
राजनीति की रेखाएं, कला के कंधे पर
जहां एक ओर देशभर में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और तेजस्वी यादव सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र की ‘यात्रा’ में जुटे हैं, वहीं चंपारण के एक कलाकार ने दिखा दिया कि लोकतंत्र सिर्फ भाषणों से नहीं, भावनाओं से भी जुड़ता है।
राजनीति, जब कला के कैनवास पर उतरती है…
ढाका में मधुरेंद्र की यह अनूठी कलाकृति न सिर्फ फोटो खिंचवाने का केंद्र बनी, बल्कि वहां मौजूद हर किसी ने एक पल के लिए राजनीति को अलग चश्मे से देखा – जहां विरोध-प्रशंसा नहीं, बस स्वागत और संस्कृति थी।


























