बिहार में टेरर लिंक की आहट? भोजपुर के ‘सिम बॉक्स’ कांड की जांच अब CBI के हाथ; बंगाल कनेक्शन ने बढ़ाई टेंशन

साइबर ठगी या देश के खिलाफ साजिश? बिहार के सिम बॉक्स रैकेट की फाइल अब CBI ने खोली, 264 फर्जी सिम का सच आएगा सामने

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना)
बिहार के भोजपुर और समस्तीपुर से जुड़े हाई-प्रोफाइल ‘सिम बॉक्स रैकेट’ मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी कमान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपने हाथों में ले ली है। यह मामला महज साइबर ठगी या सरकारी राजस्व की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने की आशंका है।

जानिए क्या है पूरा मामला? इस रैकेट का खुलासा तब हुआ था जब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने 29 जुलाई को भोजपुर के नारायणपुर (भलुनी गांव) में मुकेश सिंह के घर छापा मारा था। वहां एक अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलता पाया गया, जो ‘सिम बॉक्स’ तकनीक के जरिए विदेश से आने वाली वीओआईपी (VoIP) कॉल्स को लोकल कॉल में बदल देता था। बाद में समस्तीपुर से भी ऐसा ही एक डिवाइस बरामद हुआ।

तेलंगाना इंटेलिजेंस का इनपुट और आतंकी खतरा इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब तेलंगाना पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस सेल (CIC) ने जून 2024 में ही अलर्ट जारी कर दिया था। इंटेलिजेंस को शक है कि इस अवैध एक्सचेंज का इस्तेमाल विदेशों में बैठे आतंकी और देश विरोधी ताकतें भारत में अपने स्लीपर सेल या समर्थकों से बात करने के लिए कर रहे थे। चूंकि ये कॉल्स लोकल नंबर से आती दिखती थीं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों की रडार से बचना आसान था।

पश्चिम बंगाल के मालदा से इसके तार जुड़े पाए गए हैं। सीबीआई की शुरुआती जांच में ‘बंगाल कनेक्शन’ सामने आया है। रैकेट में इस्तेमाल किए गए 264 सिम कार्ड पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खरीदे गए थे। जांच में रेजाउल हक और मुकतदिर हुसैन नामक दो सेल प्वाइंट संचालकों के नाम सामने आए हैं।

आंकड़ों की बात करें तो 5 से 7 जुलाई के बीच महज 67 सिम कार्ड्स के जरिए 20 हजार से ज्यादा कॉल डायवर्ट की गई थीं। अब सीबीआई उन 264 लोगों की कुंडली खंगाल रही है जिनके नाम पर ये सिम कार्ड जारी हुए थे। एजेंसी यह पता लगा रही है कि क्या ये लोग महज मोहरा हैं या फिर इस बड़ी साजिश का हिस्सा।