न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार राज्य भर में करीब 65 लाख नाम हटाए गए हैं। बिहार में सबसे ज्यादा नाम किशनगंज विधानसभा क्षेत्र से हटे हैं। इसपर सियासी गलियारों से लेकर आम जनता तक में रोष है। लेकिन इस विवाद ने तब नया मोड़ ले लिया जब मतदाता सूची संशोधन अभियान (SIR – Special Intensive Revision) को लेकर कई गलत सूचनाएं फैलने लगीं। बढ़ते दबाव और भ्रम के माहौल के बीच अब चुनाव आयोग सामने आया है और स्पष्टीकरण जारी किया है।
जानिए क्या कहा चुनाव आयोग ने?
चुनाव आयोग ने सख्त लहजे में कहा है कि : “कुछ लोग यह गलत प्रचार कर रहे हैं कि बिहार की जो वोटर लिस्ट हाल ही में आई है, वह अंतिम (फाइनल) सूची है, जबकि यह महज एक ड्राफ्ट लिस्ट है।” आयोग ने बताया कि यह मसौदा सूची है और इसमें नामों को जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी रूप से संचालित हो रही है। बिना निर्वाचन पंजीकरण पदाधिकारी (ERO) की विधिवत प्रक्रिया के कोई भी नाम नहीं हटाया जा सकता। अगर किसी को ERO के निर्णय पर आपत्ति है, तो वह जिला मजिस्ट्रेट या मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पास अपील कर सकता है। डेटा के मताबिक किशनगंज विधानसभा क्षेत्र वह इलाका है जहां से सबसे अधिक नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए हैं। राज्य के 243 विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर रिवीजन हुआ है, लेकिन किशनगंज में आंकड़ा चौंकाने वाला है।
नाम गायब है? अभी भी समय है…
जो मतदाता पाते हैं कि उनका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, वे चुनाव आयोग की वेबसाइट या अपने बीएलओ से संपर्क कर Form-6 के माध्यम से नाम जुड़वाने या गलती सुधारने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।


























