न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
बिहार की विद्यालय रसोइया 24 फरवरी को पटना के गर्दनीबाग में मुख्यमंत्री के समक्ष राज्यव्यापी प्रदर्शन करेंगी। यह प्रदर्शन एक्टू से संबद्ध बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ के आह्वान पर आयोजित किया जा रहा है। रसोइयों की प्रमुख मांगों में 10 हजार रुपये मासिक मानदेय, सरकारी कर्मी का दर्जा, सामाजिक सुरक्षा, मातृत्व व विशेष अवकाश, लेबर कोड कानून की वापसी तथा मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना से एनजीओ को हटाने की मांग शामिल है। प्रदर्शन की तैयारी को लेकर रविवार को नाथनगर, जगदीशपुर एवं शाहकुंड प्रखंड के सीमावर्ती गांवों में विद्यालय रसोइयों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया गया। विभिन्न स्थानों पर आयोजित बैठकों में रसोइयों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए बड़ी संख्या में पटना पहुंचने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का नेतृत्व एक्टू राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, संयुक्त सचिव राजेश कुमार दास तथा बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ की संयोजक पूनम देवी सहित इंदु देवी, रानी देवी, चंदना देवी, पूजा कुमारी, नीलम देवी, पुष्पलता कुमारी, कामनी देवी और गीता देवी ने किया।
न्यूनतम मजदूरी से कम मानदेय का आरोप
मुकेश मुक्त ने कहा कि विद्यालय रसोइयों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम मानदेय दिया जा रहा है। उन्हें न तो मातृत्व अवकाश मिलता है और न ही कोई विशेष अवकाश। सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा एनजीओ को बढ़ावा देने से रसोइयों का रोजगार प्रभावित हो रहा है तथा बच्चों के भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा में शिक्षा मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार राज्य में वर्तमान में लगभग दो लाख रसोइया कार्यरत हैं, जबकि पांच वर्ष पूर्व उनकी संख्या ढाई लाख के करीब थी। इस प्रकार लगभग 50 हजार महिलाओं का रोजगार समाप्त हो चुका है। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण के दावों के विपरीत बताया और कहा कि रसोइयों की नई बहाली बंद है तथा कई जगह समय से पहले सेवानिवृत्ति दी जा रही है।
92 रुपये प्रतिदिन मानदेय का दावा
संघ की संयोजक पूनम देवी ने कहा कि चुनाव पूर्व मानदेय में मामूली बढ़ोतरी की गई, लेकिन अब बढ़ा हुआ भुगतान भी नियमित नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि घोषित न्यूनतम मजदूरी 541 रुपये प्रतिदिन की तुलना में रसोइयों को मात्र 92 रुपये प्रतिदिन के बराबर मानदेय दिया जा रहा है और वह भी साल में केवल 10 महीनों के लिए।उन्होंने कहा कि रसोइयों पर काम का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है, जिनमें झाड़ू लगवाना और शौचालय की सफाई जैसे कार्य भी शामिल हैं। संघ ने इन मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। संघ नेताओं ने बताया कि 24 फरवरी को राज्यभर से हजारों विद्यालय रसोइया पटना पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करेंगी। भागलपुर जिले से भी बड़ी संख्या में रसोइयों के शामिल होने की तैयारी की जा रही है।

























