कैमूर पहुंचे राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य, जेल–अस्पताल समेत कई संस्थानों का किया निरीक्षण

  • कमियां मिलने पर अधिकारियों को नोटिस भेजने की चेतावनी, दो महीने बाद दोबारा जांच का ऐलान

न्यूज स्कैन ब्यूरो, कैमूर

राज्य अनुसूचित जाति आयोग की दो सदस्यीय टीम ने मंगलवार को कैमूर जिले का दौरा कर सदर अस्पताल, मंडलकारा जेल, पुलिस लाइन और कई विद्यालयों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विभिन्न विभागों में गंभीर कमियां पाई गईं, जिस पर आयोग के सदस्यों ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए नोटिस भेजने की बात कही। आयोग ने स्पष्ट किया कि दो महीने बाद पुनः निरीक्षण किया जाएगा और यदि तब भी कमियां मिलीं तो सख्त कार्रवाई, यहां तक कि निलंबन भी किया जाएगा।
निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में आयोग के सदस्य डॉ. संजय कुमार ने कहा कि भभुआ जिले के कई विभागों में लंबे समय से भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं की शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर यह जांच की गई है। जेल, अस्पताल, विद्यालय और पुलिस लाइन सहित कई संस्थानों में खामियां सामने आई हैं। फिलहाल इसे पहली गलती मानते हुए अधिकारियों को सुधार का अवसर दिया गया है।
जेल में भोजन और दबंगई की शिकायत
मंडलकारा जेल के निरीक्षण के दौरान कैदियों को मेनू के अनुसार भोजन नहीं मिलने की शिकायत सामने आई। इसके अलावा गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कुछ कैदियों द्वारा अन्य कैदियों पर दबाव और दबंगई करने की बातें भी उजागर हुईं। इस पर आयोग ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि ऐसे कैदियों को अलग सेल में रखा जाए और सभी कैदियों को निर्धारित मेनू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जाए।
सदर अस्पताल में दवाओं को लेकर निर्देश
भभुआ सदर अस्पताल के निरीक्षण के दौरान दवा भंडार, ब्लड बैंक और वार्डों की जांच की गई। यहां शिकायत मिली कि अस्पताल में दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद डॉक्टर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। इस पर आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जो दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं, वही मरीजों को दी जाएं। केवल वही दवाएं बाहर से मंगवाई जाएं जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं हों। उन्होंने कहा कि सरकार महंगी दवाएं मरीजों की जान बचाने के लिए उपलब्ध कराती है, इसका पूरा लाभ लोगों को मिलना चाहिए।
पुलिस लाइन में अधिकारी अनुपस्थित
पुलिस लाइन के निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारी अनुपस्थित पाए गए, जिससे आयोग को आवश्यक जानकारी नहीं मिल सकी। इस पर भी नाराजगी जताई गई।
विद्यालयों में स्थिति संतोषजनक
विद्यालयों के निरीक्षण में आयोग ने अपेक्षाकृत संतोषजनक स्थिति पाई, हालांकि निगरानी जारी रखने की बात कही गई।
दो महीने बाद फिर होगी जांच
डॉ. संजय कुमार ने कहा कि यह उनकी पहली जांच थी, इसलिए चेतावनी देकर छोड़ा जा रहा है। लेकिन दो महीने बाद पुनः जांच की जाएगी। यदि तब भी कमियां मिलीं तो संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं को ईमानदारी से आम जनता तक पहुंचाएं, अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें। आयोग द्वारा नोटिस भेजे जाने पर अधिकारियों को न्यायालय में भी जवाब देना होगा।