रविंद्र कुमार शर्मा, भागलपुर
जिले के सुल्तानगंज स्थित पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा तट पर सावन माह में आस्था का महासागर उमड़ पड़ा है। देश-विदेश से लाखों शिवभक्त यहां पहुंचकर गंगा में आस्था की डुबकी लगाते हैं और 105 किलोमीटर दूर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय से आए दो युवा श्रद्धालु अजय गुप्ता और कुंदन साहनी ने आस्था, सेवा और संकल्प का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। इन दोनों श्रद्धालुओं ने सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ धाम से 100 किलो गंगाजल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए पैदल यात्रा शुरू की है। खास बात यह है कि दोनों नंगे पांव यात्रा कर रहे हैं और भारी कांवड़ अपने कंधों पर उठाए हुए हैं।
दो संकल्प, एक यात्रा
दोनों युवाओं का उद्देश्य सिर्फ धार्मिक नहीं, सामाजिक भी है। उनका कहना है कि यह यात्रा उन्होंने एक विशेष मन्नत के साथ शुरू की है, गौ माता को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाना और लाचार, बेसहारा, जरूरतमंद लोगों के लिए एक सेवा आश्रम की स्थापना करना। यह उनकी वर्षों से की गई प्रार्थना और समाज सेवा का संकल्प है जिसे वे बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित कर पूर्ण करना चाहते हैं।
लोगों से की अपील
यात्रा के दौरान दोनों श्रद्धालुओं ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपने माता-पिता की सेवा करें और उन्हें सम्मान दें। उनके अनुसार यही सच्ची भक्ति और मानव धर्म है।
श्रावण मास में यह यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक सामाजिक संदेश भी बनकर सामने आई है। निस्वार्थ सेवा, सामाजिक संकल्प और अध्यात्म का यह संगम श्रद्धालुओं की भक्ति को और अधिक ऊंचाई प्रदान करता है।
अजय गुप्ता, कांवरिया
“हम बाबा से प्रार्थना करेंगे कि हमें संकल्प पूरा करने की शक्ति दें, ताकि हम सेवा का वो केंद्र बना सकें जो समाज के अंतिम व्यक्ति को सहारा दे।”
कुंदन साहनी, कांवरिया
“गौ माता को राष्ट्रीय सम्मान दिलाना हमारा सपना है। हम चाहते हैं कि हर नागरिक इसका समर्थन करे।”

































