न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
बिहार के लिपिक वर्ग की नाराजगी अब सड़कों तक पहुंच चुकी है। रविवार को भागलपुर के मनोरंजन भवन में बिहार अनुसचिवीय कर्मचारी संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाहरणालय संवर्ग के सभी लिपिकों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में वेतन विसंगति, पदोन्नति में देरी, और सरकारी नीतियों की अनदेखी को लेकर खुलकर चर्चा की गई।
बैठक की प्रमुख बातें
इस महत्वपूर्ण बैठक में 9 मांगें प्रमुखता से रखी गईं, जो इस प्रकार हैं:
- ग्रेड-पे में सुधार एवं समानता सुनिश्चित किया जाए।
- योग्यता के अनुसार वेतन पुनर्निर्धारण किया जाए।
- लिपिकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए।
- हर कर्मचारी को ₹50 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा मिले।
- राज्य स्तरीय संवर्ग से जिला कर्मियों को मुक्त किया जाए।
- पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए।
- पदोन्नति की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
- कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
- संवर्गीय ढांचा संशोधित कर समान कार्य के लिए समान वेतन लागू किया जाए।
बैठक में वक्ताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वर्षों से लिपिकों की मांगों की अनदेखी की जा रही है। न तो वेतन विसंगति दूर की गई और न ही पदोन्नति की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई।
आंदोलन की रणनीति तय
बैठक में तय किया गया कि महासंघ के नेतृत्व में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। संघ के भागलपुर इकाई के अध्यक्ष अविनाश कुमार ने घोषणा की कि “हमारी पहली चेतावनी 6 अगस्त को होगी। उस दिन पटना के गर्दनीबाग में एक दिवसीय महा धरना का आयोजन किया जाएगा। अगर इसके बावजूद सरकार ने हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की जाएगी।”

सरकार के लिए चुनौती
बिहार सरकार के लिए यह आंदोलन नई परेशानी खड़ी कर सकता है, क्योंकि सचिवालय और जिलों में लिपिक वर्ग की अहम भूमिका होती है। आंदोलन तेज़ होने की स्थिति में सरकारी कामकाज ठप हो सकता है।
संघ की चेतावनी
संघ ने साफ कहा है कि जब तक लिपिकों को उनका वाजिब हक नहीं मिलेगा, वे पीछे नहीं हटेंगे। यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो सचिवालय से लेकर जिलों तक “कलमबंद हड़ताल” की स्थिति बन सकती है।


























