नवगछिया अनुमंडल अस्पताल बीमार, हेल्थ सिस्टम को चाहिए बूस्टर डोज

नवगछिया। सरकार द्वारा लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की परिकल्पना नवगछिया में धरातल पर नहीं दिख रही है। नवगछिया में कहने को अनुमंडलीय अस्पताल की स्थापना तो कर दी गयी लेकिन इस अस्पताल की सुविधा की ओर अभी तक विभाग का ध्यान नहीं जा रहा है। नवगछिया के अनुमंडलीय अस्पताल आधुनिक स्वास्थ्य उपकरण, संसाधन एवं मेडिकल कर्मियों की कमी का दंश झेल रहा है। हैरत इस बात की है कि एनएच-31 से जुड़े इस अस्पताल में जबकि अधिक से अधिक एक्सिडेंट के पीड़ित मरीज पहुंचते हैं उनके लिए यहां ड्रेसर तक नहीं है। चिकित्सक भागलपुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल मायागंज के भरोसे गंभीर मरीजों को रेफर कर अपने कार्य की जिम्मेदारी समझ लेते हैं। उल्लेखनीय है कि अनुमंडल क्षेत्र के सात प्रखंडों की आबादी के लिए और एनएच-31 पर सफर करने वाले राहगीरों के लिए यह अस्पताल लाइफ लाइन है। दुर्घटना पीड़ित कई लोग तो गंगा पार मेडिकल कॉलेज जाने के क्रम में अपनी जान गंवा देते हैं।

एक साल से बंद है ऑक्सीजन प्लांट

वहीं अनुमंडल अस्पताल में वर्ष 2021 को बनाए गए ऑक्सीजन प्लांट को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह प्लांट पिछले एक साल से पूरी तरह बंद पड़ा है, जिससे अस्पताल में ऑक्सीजन आपूर्ति व्यवस्था चरमराई हुई है। अस्पताल प्रबंधन को ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर खरीदकर मरीजों के इलाज की व्यवस्था कर रहा है

डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों के पद खाली, 30 के बदले 13 स्टाफ नर्स

यहां 30 डॉक्टरों की जगह है जिसमें मात्र 10 कार्यरत हैं। खास कर दो चाइल्ड स्पेशलिस्ट, ऑथर्थोपेडिक डॉक्टर और ड्रेसर तक नहीं है। दो जनरल फिजिशियन, दो जनरल सर्जन, गायनोलॉजिस्ट डॉक्टर, दो चर्म रोग विशेषज्ञ, दो एनेस्थेटिक डॉक्टर, दो ईएनटी डॉक्टर, आंख वाले एक डॉक्टर, एक हड्डी वाले डॉक्टर, नौ सामान्य और महिला चिकित्सक रहना है। एक डेंटल डॉक्टर, फार्मासिस्ट का एक पद सृजन है मगर यहां पोस्टिंग नहीं है। ड्रेसर के पांच पद है, स्टाफ नर्स के 30 पदों में केवल 13 पर ही पोस्टिंग हुई है। ब्लड स्टोरेज में न तो टेक्नीशियन है, न ही विशेषज्ञ डॉक्टर है। वहीं अस्पताल की डेंटल यूनिट महीनों से बंद है। दांत के दर्द, संक्रमण या सफाई के लिए आने वाले मरीज हर दिन वहां से निराश लौटते हैं और अंततः उन्हें निजी क्लीनिक जाना पड़ता है।

एनएच पर हड्डी टूटी, तो पेन किलर दवा देकर मायागंज रेफर

हर दिन सड़क दुर्घटनाओं में घायल दर्जनों मरीज नवगछिया अनुमंडल अस्पताल पहुंचते हैं। हड्डी टूटने के मरीज अगर आ गये, तो सीधे मायागंज रेफर किया जायेगा, अगर सक्षम मरीज है तो बाहर निजी पैथोलॉजी में जांच और एक्स-रे करवा कर ले आयेंगे, अन्यथा यहां मरीजों को केवल पेन किलर दवा से तत्काल राहत दे दी जाती है।

52 वर्ष बाद भी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तरस रहा अनुमंडल अस्पताल

लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने और एनएच पर दुर्घटना पीड़ितों के तत्काल इलाज के लिए वर्ष 1972 में इस अनुमंडल अस्पताल की स्थापना की गयी थी। अभी भी यहां जरूरी संसाधनों का घोर अभाव है, महीनों से अल्ट्रासाउंड सेवा बंद है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार अल्ट्रासाउंड में सेवारत डॉक्टर मातृत्व अवकाश पर है। यहां जरूरत के अनुसार न डॉक्टर है और न ही जरूरत के अनुसार चिकित्साकर्मी है।

डॉक्टर पिंकेश कुमार, प्रभारी उपाधीक्षक , अनुमंडल अस्पताल नवगछिया ने कहा कि उसमें कुछ खराबी आ गई है इसको लेकर हमने अपने वरीय अधिकारियों को और सिविल सर्जन को पत्र लिखा है, पूर्व में भी जो उपाधीक्षक महोदय थे उनके द्वारा भी लिखा गया था। उस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है और उसका मरम्मत नहीं हो पाया है। लगभग 10 से 12 बार पत्र लिखा गया है। जहां तक मुझे जानकारी है नई बिल्डिंग बनने की प्रकिया शुरू हो गई है, मैपिंग हो चुकी है। नया बॉन्डिंग बनना है जो क्षतिग्रस्त बिल्डिंग है उसको लेकर हमने वरीय अधिकारी को सूचित किया है। स्थिति दयनीय है, कभी भी हादसा हो सकता है।