बिहार के सरकारी स्कूलों में ‘AI क्रांति’: अब कक्षा 8वीं से 12वीं के छात्र बनेंगे भविष्य के ‘टेक-लीडर’

बिहार की शिक्षा व्यवस्था अब पारंपरिक ब्लैकबोर्ड से आगे निकलकर ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) की दुनिया में कदम रखने जा रही है। राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों की कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वाकांक्षी AI एजुकेशन प्रोग्राम लागू करने का निर्णय लिया है। यह पहल न केवल छात्रों को तकनीक से जोड़ेगी, बल्कि उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार करेगी।

पटना, न्यूज़ स्कैन ब्यूरो
शिक्षा विभाग के अनुसार, यह पूरा प्रोग्राम NCERT द्वारा तैयार किए गए मॉडल पर आधारित होगा। इसमें केवल थ्योरी नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल पर जोर दिया गया है। दीक्षा (DIKSHA) प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्र ‘वीडियो सर्च’ और ‘रीड-अलाउड’ जैसे अत्याधुनिक टूल्स का उपयोग कर सकेंगे, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक रोचक और सुलभ हो जाएगी।

तीन मुख्य मॉड्यूल
इस योजना को ‘स्क्लिंग फॉर एआई रीडिनेस’ के तहत तीन प्रमुख चरणों (Modules) में बांटा गया है, जो प्रत्येक 15 घंटे के होंगे:

AI टू बी अवेयर: तकनीक की बुनियादी समझ विकसित करना।

AI टू एक्वायर: तकनीकी कौशल और प्रोग्रामिंग को सीखना।

AI टू एस्पायर: भविष्य के करियर और नवाचार के लिए खुद को तैयार करना।

क्यों जरूरी है यह कदम?
आज के दौर में जब दुनिया Generative AI और मशीन लर्निंग की ओर बढ़ रही है, बिहार के ग्रामीण और शहरी सरकारी स्कूलों में इस प्रोग्राम का लागू होना एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है। पाठ्यक्रम में ‘साइबर सुरक्षा’, ‘न्यूरल नेटवर्क’ और ‘एआई के जिम्मेदार उपयोग’ जैसे विषयों को शामिल किया गया है। यह न केवल छात्रों के डिजिटल कौशल को निखारेगा, बल्कि उनके भीतर छिपे हुए तकनीकी विजन को भी दिशा देगा। अगले साल से प्रारंभिक विद्यालयों में भी इसके विस्तार की योजना है, जो यह संकेत देती है कि बिहार सरकार अब शिक्षा को ‘ग्लोबल स्टैंडर्ड’ के अनुरूप ढालने के लिए गंभीर है।