न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार सरकार बच्चों में मोबाइल की बढ़ती लत और ऑनलाइन गेमिंग के दुष्प्रभावों को देखते हुए एक व्यापक राज्य-स्तरीय नीति (Policy) बनाने जा रही है। सोमवार को विधानसभा में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्रेयसी सिंह ने इस संबंध में घोषणा की।
विधानसभा में बड़ी घोषणा
सिकता के विधायक समृद्ध वर्मा द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों का स्क्रीन टाइम खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका है, जो उनके भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। आईटी मंत्री श्रेयसी सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल साइंसेज’ की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेगी और कई विभागों के समन्वय से उच्च मानक तय किए जाएंगे।
क्यों पड़ी नीति की जरूरत?
विशेषज्ञों और शोध के आंकड़ों के अनुसार स्थिति चिंताजनक है:
8 से 16 वर्ष के बच्चे प्रतिदिन औसतन 4 से 7 घंटे स्क्रीन पर बिता रहे हैं।
कोरोना काल में पढ़ाई के लिए मिला मोबाइल अब बच्चों की दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बन चुका है।
पढ़ाई के अलावा गेमिंग, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया ने औसत स्क्रीन टाइम कई गुना बढ़ा दिया है।
अत्यधिक मोबाइल उपयोग के गंभीर प्रभाव
समाचार रिपोर्टों में विशेषज्ञों के हवाले से कई शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभावों का उल्लेख किया गया है:
मानसिक और व्यावहारिक प्रभाव
मस्तिष्क विकास की गति धीमी होना और याददाश्त कमजोर होना।
एकाग्रता (Focus) में कमी और स्वभाव में चिड़चिड़ापन, गुस्सा व आक्रामकता का बढ़ना।
सीखने की क्षमता और रचनात्मकता में कमी आना।
सामाजिक मेलजोल, दोस्तों के साथ खेलना और परिवार से बातचीत कम होना।
शारीरिक प्रभाव
आंखों पर असर: लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन की समस्या।
नींद में कमी: मोबाइल की नीली रोशनी (Blue Light) से नींद के हार्मोन प्रभावित होना।
शारीरिक ढांचा: लंबे समय तक झुककर बैठने से गर्दन और रीढ़ की हड्डी में समस्या।
मोटापा: शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण बच्चों में वजन बढ़ना।
बिहार बन सकता है देश का मॉडल
वर्तमान में देश में बच्चों के स्क्रीन टाइम पर कोई स्पष्ट राज्य-स्तरीय नीति नहीं है। हालांकि तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों ने ऑनलाइन गेमिंग को लेकर पहल की है, लेकिन यदि बिहार एक व्यापक स्क्रीन टाइम नीति लाता है, तो यह देश की पहली ऐसी समग्र पहल हो सकती है।
माता-पिता के लिए सुझाव
बच्चों के लिए मोबाइल प्रयोग की समय-सीमा निर्धारित करें।
बच्चों के सामने बहुत जरूरी होने पर ही मोबाइल का उपयोग करें।
घर में बाल उपयोगी साहित्य और पुस्तकें पढ़ने की आदत डालें।
मोबाइल दें भी तो उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें।

























