भ्रष्टाचार पर बिहार सरकार का ‘डिजिटल हंटर’: अब सार्वजनिक होगी दागी अफसरों की सूची, प्रमोशन का रास्ता बंद!

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में सरकारी सेवा के दौरान भ्रष्टाचार में लिप्त रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की अब खैर नहीं है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को धरातल पर उतारने के लिए एक कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब दागी अफसरों का कच्चा चिट्ठा बंद फाइलों में नहीं दबेगा, बल्कि उनकी सूची साल में दो बार सार्वजनिक की जाएगी।
नई व्यवस्था के मुताबिक फाइलों के भरोसे नहीं बल्कि प्रमोशन ‘स्वच्छता सूची’ से तय होगा। निगरानी विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) केवल उनके काम के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी बेदाग छवि के आधार पर होगी। हर साल जनवरी और जुलाई महीने में निगरानी विभाग उन कर्मियों की सूची जारी करेगा जिनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज है या चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।अनिवार्य प्रमाण पत्र: 30 जून 2026 तक जिन भी अधिकारियों का प्रमोशन देय है, उन्हें ‘निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र’ प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
यह सूची न केवल विभागों को भेजी जाएगी, बल्कि इसे निगरानी विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा, ताकि कोई भी इसे देख सके। सरकार की इस नई व्यवस्था से ‘फाइल कल्चर’ पर चोट की गई है। निगरानी विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ जांच एजेंसियों (निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई और आर्थिक अपराध इकाई) ने केस दर्ज किए हैं, उनका पूरा विवरण सीडी (CD) के माध्यम से संबंधित विभागों और प्रमंडलों को भेजा जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी दागी कर्मी को अनजाने में या फाइलों की देरी के कारण प्रमोशन न मिल सके।