बिहार में जमीन के ‘काले अध्यायों’ का होगा अंत: टोपोलैंड और असर्वेक्षित भूमि के सर्वे से आम आदमी को क्या मिलेगा?

बिहार सरकार ने राज्य में दशकों से लंबित टोपोलैंड (Topoland) और असर्वेक्षित भूमि (Unsurveyed Land) के सर्वे की प्रक्रिया तेज कर दी है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 10 अप्रैल को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। इस पहल का सीधा मकसद उस जमीन का मालिकाना हक और प्रकृति तय करना है, जो अब तक सरकारी रिकॉर्ड में ‘अस्पष्ट’ रही है।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
राज्य में ऐसी लाखों एकड़ जमीन है जिसका आज तक व्यवस्थित सर्वे नहीं हुआ है। खासकर नदियों के किनारे वाली जमीन (टोपोलैंड) और ‘बकास्त’ भूमि को लेकर अक्सर विवाद होते रहते हैं। सरकार अब इन जमीनों की विस्तृत सूची मंगाकर उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने जा रही है।

आम आदमी को होने वाले 5 बड़े फायदे

  1. जमीनी विवादों और मुकदमों से मुक्ति
    बिहार में दीवानी मुकदमों (Civil Cases) का सबसे बड़ा कारण जमीन की अनिश्चितता है। सर्वे होने के बाद जमीन की चौहद्दी और प्रकृति (Nature of land) स्पष्ट हो जाएगी, जिससे पड़ोसियों या दबंगों के साथ होने वाले विवाद खत्म होंगे।
  2. जमीन की खरीद-बिक्री में आसानी और सुरक्षा
    अभी असर्वेक्षित भूमि को खरीदना या बेचना जोखिम भरा होता है क्योंकि उसका कोई पुख्ता सरकारी रिकॉर्ड नहीं होता। सर्वे के बाद इन जमीनों को डिजिटल रिकॉर्ड (Jamabandi) से जोड़ा जाएगा, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
  3. मुआवजा मिलने का रास्ता होगा साफ
    जब भी सरकार सड़क, पुल या किसी प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहित करती है, तो असर्वेक्षित भूमि के मालिकों को ‘कागजात की कमी’ के कारण मुआवजा नहीं मिल पाता। सर्वे के बाद इन जमीनों का रिकॉर्ड वैध हो जाएगा, जिससे किसानों को सरकारी मुआवजा आसानी से मिल सकेगा।
  4. बैंक लोन और क्रेडिट कार्ड की सुविधा
    बिना सर्वे और स्पष्ट रिकॉर्ड के बैंकों से जमीन पर लोन लेना असंभव होता है। सर्वे के बाद आम आदमी अपनी इसी जमीन को गिरवी रखकर व्यवसाय या कृषि कार्य के लिए लोन ले सकेगा।
  5. सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ
    खेती के लिए मिलने वाली सब्सिडी, फसल बीमा या पीएम-किसान जैसी योजनाओं का लाभ लेने के लिए स्पष्ट भूमि रिकॉर्ड अनिवार्य है। टोपोलैंड के किसानों को इस सर्वे के बाद ये तमाम सरकारी लाभ मिलने लगेंगे।

क्या है सरकार की तैयारी?
डिटेल रिपोर्ट: सभी जिलाधिकारियों (DMs) से असर्वेक्षित भूमि की सूची मांगी गई है।

पारदर्शिता: विभाग का लक्ष्य नियमों को ‘विवादरहित’ और ‘पारदर्शी’ बनाना है।

ठोस नीति: सर्वे के आंकड़ों के आधार पर सरकार इन जमीनों के बेहतर उपयोग और आवंटन के लिए नई नीति बनाएगी।