न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 अप्रैल 2026 से नया टैरिफ लागू होने जा रहा है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) आगामी 15 या 16 मार्च को नई दरों की घोषणा कर सकता है। इस नए बदलाव में सबसे खास बात यह है कि जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की दरों में बढ़ोतरी की संभावना है, वहीं शहरी उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
प्रमुख बदलाव और राहत की रणनीति
राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग के अनुसार, इस टैरिफ संशोधन का मुख्य उद्देश्य लागत का सही समायोजन करना है। हालांकि दरें बढ़ेंगी, लेकिन ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि आम आदमी की जेब पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। सरकार बढ़ी हुई दरों की भरपाई अनुदान (Subsidy) बढ़ाकर करेगी।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों पर क्या होगा असर?
शहरी क्षेत्र: वर्तमान में शहरों में दो अलग-अलग स्लैब लागू हैं। बिजली कंपनियाँ इन्हें मर्ज (एकत्रित) करने की योजना बना रही हैं, जिससे औसत दर कम होने की उम्मीद है।
ग्रामीण क्षेत्र: यहाँ पहले से ही एक स्लैब लागू है, इसलिए लागत वृद्धि का असर यहाँ ज्यादा दिखने की संभावना है।
दरों में बदलाव की बड़ी वजह
बिजली दरों में इस संशोधन के पीछे एक मुख्य कारण विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) का आदेश है। साल 2012 के बकाये और ब्याज को मिलाकर लगभग 3200 करोड़ रुपये के भुगतान का दबाव है। इसके अलावा, बिजली खरीद और बुनियादी ढांचे के रखरखाव की बढ़ती लागत के कारण वितरण कंपनियों ने प्रति यूनिट 35 पैसे तक की बढ़ोतरी की मांग की है।
सरकार का भारी-भरकम बजट आवंटन
आम जनता को राहत देने के लिए बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष के लिए भारी सब्सिडी का प्रावधान किया है:
15,995 करोड़ रुपये: कुल बिजली अनुदान के लिए।
3,797 करोड़ रुपये: 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना (1.86 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए) के लिए।
महत्वपूर्ण तिथि: नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी और 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी।

























