न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार के शिक्षा जगत में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल होने जा रहा है। राज्य के करीब 75,640 सरकारी स्कूलों में अब हाजिरी का पारंपरिक रजिस्टर इतिहास का हिस्सा बनने वाला है। अगले महीने से स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति के लिए टैबलेट आधारित डिजिटल व्यवस्था अनिवार्य की जा रही है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस तकनीक से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS): तकनीक की पैनी नजर
इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत ‘फेस रिकग्निशन सिस्टम’ है। अब शिक्षकों और विद्यार्थियों को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए टैबलेट के कैमरे के सामने आना होगा।
ई-शिक्षा कोष से जुड़ाव: हाजिरी बनते ही डेटा रीयल-टाइम में शिक्षा विभाग के ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज हो जाएगा।
ग्रुप फोटो का ‘पेंच’: फर्जी उपस्थिति रोकने के लिए वर्ग शिक्षक को कक्षा के सभी बच्चों का एक सामूहिक फोटो भी अपलोड करना होगा।
सीधी मॉनिटरिंग: शिक्षा विभाग के मुख्यालय से अब किसी भी जिले या प्रखंड के स्कूल की रीयल-टाइम रिपोर्ट देखी जा सकेगी।
MDM और भ्रष्टाचार पर भी होगा प्रहार
टैबलेट हाजिरी का असर केवल उपस्थिति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव मध्याह्न भोजन (MDM) योजना पर भी पड़ेगा।
सटीक डेटा: चूंकि बच्चों की उपस्थिति का डेटा पारदर्शी होगा, इसलिए एमडीएम में संख्या बढ़ाकर राशन की चोरी करने जैसी गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी।
समय की बचत: रजिस्टरों पर लंबी हाजिरी बनाने में जो समय बर्बाद होता था, अब वह सीधे पढ़ाई में उपयोग किया जा सकेगा।
जवाबदेही: मुख्यालय से सीधी निगरानी होने के कारण शिक्षकों में समय की पाबंदी को लेकर एक सकारात्मक डर और जिम्मेदारी का भाव पैदा होगा।
11 जिलों में तैयारी को रफ्तार देने के निर्देश
समीक्षा में पाया गया है कि राज्य के 96 प्रतिशत स्कूलों में टैबलेट वितरित किए जा चुके हैं। पूर्णिया, पटना, लखीसराय, सीवान, वैशाली, सहरसा, गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, कटिहार, पूर्वी चंपारण और अरवल जैसे 11 जिलों में अभी टैबलेट वितरण 95 प्रतिशत के करीब है। अपर मुख्य सचिव ने इन जिलों में फरवरी तक काम पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है ताकि योजना को पूरी तरह लागू किया जा सके।



























