बिहार में शिक्षकों के लिए ‘IAS कैडर’ जैसी रैंकिंग प्रणाली: अब अनुभव और योग्यता तय करेगी स्कूल की कमान

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार के सरकारी स्कूलों में अक्सर होने वाले ‘प्रभार’ (Charge) के विवादों को खत्म करने के लिए शिक्षा विभाग ने एक क्रांतिकारी निर्णय लिया है। अब राज्य के 5.85 लाख शिक्षकों की वरिष्ठता सूची (Seniority List) प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों (IAS) की तर्ज पर तैयार की जाएगी।

इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य स्कूलों के भीतर पद और पावर को लेकर होने वाले आपसी टकराव को शून्य करना है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हर साल प्रभार विवाद से जुड़ी लगभग 7,000 शिकायतें मुख्यालय पहुंचती हैं, जिन्हें अब नई रैंकिंग प्रणाली से सुलझाया जाएगा।

नई रैंकिंग प्रणाली के मुख्य बिंदु:
योग्यता और अनुभव का मेल: शिक्षकों की रैंकिंग केवल सेवा के वर्षों पर नहीं, बल्कि उनकी शैक्षणिक योग्यता (Qualification), विषय की विशेषज्ञता और उनके पढ़ाए जाने वाले ग्रेड के आधार पर तय होगी।

श्रेणीवार सूची: यह रैंकिंग चार स्तरों पर तैयार की जाएगी: (1-5), (6-8), (9-10) और (11-12) कक्षा के शिक्षक।

बड़े स्कूल, अनुभवी हाथ: अधिक अनुभव और उच्च योग्यता वाले शिक्षकों को बड़े और अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों की जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि कम अनुभव वालों को छोटे स्कूलों का प्रबंधन सौंपा जाएगा।

मॉडल स्कूलों के लिए विशेष मानक: राज्य के 534 प्रखंडों में खुलने वाले मॉडल स्कूलों के लिए ‘स्मार्टनेस’ और भाषा ज्ञान को प्राथमिकता मिलेगी। हिंदी-अंग्रेजी के साथ अन्य भाषाओं के जानकार और M.Ed/PhD धारकों को पहली वरीयता (First Ranking) मिलेगी।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
वर्तमान में कई स्कूलों में हेडमास्टर या प्रभारी के पद को लेकर शिक्षकों के बीच विवाद, गाली-गलौज और मारपीट तक की खबरें आती हैं। विभाग का मानना है कि इस ‘चेन ऑफ कमांड’ के स्पष्ट होने से शिक्षकों का ईगो क्लैश खत्म होगा और स्कूल के वातावरण में सुधार आएगा। बेहतर रैंकिंग पाने वाले शिक्षकों के लिए अच्छे संसाधनों वाले स्कूलों में पोस्टिंग एक ‘रिवॉर्ड’ की तरह काम करेगी।