RL-मोर्चा में ‘पुत्र मोह’ पर महासंग्राम: विधायक रामेश्वर महतो ने खोला मोर्चा, क्या टूट जाएगी उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी?

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार की क्षेत्रीय राजनीति में एक बार फिर ‘वंशवाद’ का जिन्न बाहर निकल आया है। इस बार निशाने पर हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा। उनकी पार्टी ‘राष्ट्रीय लोक मोर्चा’ (RLM) में उस वक्त बड़ी दरार दिखाई दी, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और बाजपट्टी (सीतामढ़ी) से विधायक रामेश्वर महतो ने नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत का ऐलान कर दिया। मामला उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री पद दिए जाने से जुड़ा है। फिलहाल, सबकी निगाहें उपेंद्र कुशवाहा पर टिकी हैं कि क्या वे अपने विधायक को मनाने के लिए कोई कदम उठाते हैं या पार्टी विभाजन की ओर बढ़ती है।

“पार्टी के लिए आत्मघाती है यह फैसला”
विधायक रामेश्वर महतो ने सीधे तौर पर उपेंद्र कुशवाहा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने के निर्णय को ‘पार्टी के लिए सुसाइडल’ करार दिया है। महतो का कहना है कि जिस विचारधारा (लोहिया, जेपी और कर्पूरी ठाकुर) की कसमें खाकर कुशवाहा ने दशकों तक राजनीति की, आज वे उसी के खिलाफ जाकर परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।

विधायक ने कड़े शब्दों में कहा:
“पार्टी फिलहाल अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। नेतृत्व की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। अगर समय रहते आत्ममंथन नहीं किया गया, तो पार्टी का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।”

कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष
सूत्रों के मुताबिक, केवल विधायक ही नहीं, बल्कि पार्टी के कई समर्पित कार्यकर्ता भी इस फैसले से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। रामेश्वर महतो ने चेतावनी दी है कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी चरम पर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि कुशवाहा ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो पार्टी में बड़ी टूट तय है।

बीजेपी के साथ बढ़ती नजदीकी?
इस पूरे विवाद के बीच रामेश्वर महतो की भाजपा नेता और मंत्री नितिन नवीन से हुई मुलाकात ने सियासी पारे को और गरमा दिया है। हालांकि, महतो इसे ‘शिष्टाचार मुलाकात’ बता रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे पाला बदलने की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं। जब उनसे भविष्य की रणनीति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने रहस्यमयी तरीके से कहा कि “सब कुछ भविष्य के गर्भ में है।”

क्या है सियासी मायने?
साख का संकट: उपेंद्र कुशवाहा हमेशा लालू यादव और कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाते रहे हैं। अब अपने ही बेटे को आगे बढ़ाने के आरोप से उनकी ‘नैतिक राजनीति’ की साख पर सवाल उठ रहे हैं।

अब आगे क्या हो सकता है?
संगठनात्मक बिखराव : आरएलएम जैसी छोटी पार्टियों के लिए विधायक का विद्रोह करना अस्तित्व का संकट पैदा कर सकता है।
गठबंधन पर असर : बिहार में सत्ता समीकरणों के बीच कुशवाहा की पार्टी के भीतर यह विद्रोह एनडीए के आंतरिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।