न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार अब बिजली के लिए सिर्फ कोयले या बाहरी ग्रिड पर निर्भर नहीं रहेगा। राज्य में ‘परमाणु बिजली घर’ निर्माण की दिशा में एक बड़ी बाधा पार कर ली गई है। बांका, नवादा और सीवान जिलों में प्रारंभिक सर्वे का काम पूरा हो चुका है और इसकी रिपोर्ट बिजली कंपनी को सौंप दी गई है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो वित्तीय वर्ष 2027-28 से बिहार में पहले परमाणु बिजली घर का निर्माण शुरू हो सकता है।
सर्वे रिपोर्ट में क्या है खास?
केंद्र सरकार के सहयोग से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के लिए NPCIL (न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) और NTPC की संयुक्त टीम ने सर्वे किया है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर ध्यान दिया गया है:
स्थलों का चयन: बांका, नवादा और सीवान जिलों में जमीन की उपलब्धता और कनेक्टिविटी की जांच की गई है।
पानी की उपलब्धता: परमाणु संयंत्र को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है (1 मेगावाट के लिए लगभग 1800 लीटर)।
नवादा और बांका को इस लिहाज से बेहतर माना गया है, जबकि सीवान में भूकंपीय संवेदनशीलता का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।
पानी की उपलब्धता के एंगल से भी अभी देखा जा रहा है।
सुरक्षा: भूकंपीय जोन और आबादी के घनत्व को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम साइट का चयन किया जाएगा।
SMR तकनीक: बिहार के लिए क्यों है बेहतर?
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जून 2025 में पटना में आयोजित ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) तकनीक का प्रस्ताव रखा था।
यह तकनीक पारंपरिक परमाणु संयंत्रों की तुलना में अधिक सुरक्षित और कुशल मानी जाती है।
छोटे आकार के कारण इन्हें स्थापित करना आसान है और इनसे होने वाला उत्सर्जन शून्य के बराबर होता है।
असर और फायदे: बिहार की बदल जाएगी तस्वीर
इस परियोजना के धरातल पर उतरने से बिहार को बहुआयामी लाभ होंगे:
- ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: बिहार वर्तमान में अपनी बिजली जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा केंद्रीय पूल से खरीदता है। परमाणु बिजली घर शुरू होने से राज्य न केवल अपनी खपत पूरी कर पाएगा, बल्कि बिजली सरप्लस (Surplus) राज्य भी बन सकता है।
- औद्योगिक विकास को मिलेगी गति: सस्ती और निर्बाध बिजली उद्योगों की पहली जरूरत होती है। परमाणु संयंत्र से मिलने वाली स्थिर बिजली बिहार में निवेश के नए द्वार खोलेगी, जिससे बंद पड़ी फैक्ट्रियों को पुनर्जीवित करने और नए कारखाने लगाने में मदद मिलेगी।
- रोजगार के हजारों नए अवसर: निर्माण कार्य से लेकर संयंत्र के संचालन तक, हजारों तकनीकी और गैर-तकनीकी विशेषज्ञों, श्रमिकों और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। यह पलायन रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
- 24×7 सस्ती बिजली का सपना होगा सच: कोयले की बढ़ती कीमतों के कारण थर्मल पावर की लागत बढ़ रही है। लंबी अवधि में परमाणु ऊर्जा सबसे सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा साबित होती है, जिसका सीधा लाभ बिहार के आम उपभोक्ताओं को कम बिजली बिल के रूप में मिलेगा।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि, रजौली (नवादा) में परमाणु बिजली घर की योजना सालों पहले भी बनी थी लेकिन किन्हीं कारणों से ठंडे बस्ते में चली गई थी। इस बार राज्य सरकार की सक्रियता और केंद्र के ठोस कदम (DPR निर्माण पर काम) ने नई उम्मीद जगाई है। ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के अनुसार, अब इस दिशा में जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।

































