भागलपुर से पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने चुनाव प्रक्रिया में ईवीएम की बजाय पेपर वोटिंग की मांग की

न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर

भागलपुर के पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने भारतीय चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर लोकतंत्र की मजबूती और मतदाताओं में भरोसा बनाए रखने के लिए मतदान प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की बजाय पेपर वोटिंग अपनाने का आग्रह किया है।
पत्र में श्री शर्मा ने कहा है कि हाल के वर्षों में ईवीएम से जुड़ी कई त्रुटियां और विवाद चुनाव की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि 11 नवंबर को हुए भागलपुर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव की मतगणना 14 नवंबर को राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में हुई। मतगणना के दौरान जब कई बूथों के कंट्रोल यूनिट लाए गए तो उनका नंबर फॉर्म 17ब् में अंकित नंबर से अलग था। संबंधित काउंटिंग एजेंटों ने आपत्ति जताई, जिससे लगभग आधा घंटा मतगणना रुकी रही, लेकिन बाद में मतगणना जबरन कर दी गई।
श्री शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि बिहार विधानसभा के चुनाव में मतदान से लेकर मतगणना तक निष्पक्षता बनी नहीं रही। उन्होंने बताया कि विपक्षी दलों और विशेषज्ञों ने भी ईवीएम में हेरफेर, गिनती में असंगति और सुरक्षा कमियों की बात उठाई है। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में कई शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिसमें पोस्टल बैलट की गिनती में प्राथमिकता न देने और वीवीपीएटी स्लिप्स की सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी शामिल है।
विधायक अजीत शर्मा ने पत्र में कहा कि पेपर वोटिंग प्रणाली अधिक पारदर्शी है, क्योंकि मतदाता स्वयं अपना वोट देख सकता है और गिनती में कोई तकनीकी हस्तक्षेप नहीं होता। उन्होंने चुनाव आयोग से अनुरोध किया कि विवादों को ध्यान में रखते हुए बैलट पेपर प्रणाली को पुनः अपनाने पर विचार किया जाए।
श्री शर्मा का कहना है कि हालांकि ईवीएम को चुनावों में धोखाधड़ी कम करने के लिए अपनाया गया है, लेकिन विवादों और तकनीकी खामियों को देखते हुए क्या बैलट पेपर पर वापस लौटना उचित नहीं होगा।