भागलपुर में ‘दमघोंटू’ हुई हवा : 25 मिनट में 100 अंक उछला AQI, ‘खतरनाक’ स्तर पर पहुंचे प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता

न्यूज स्कैन ब्यूरो, भागलपुर
बिहार के सिल्क सिटी भागलपुर में इस समय साँस लेना दूभर हो गया है। आज शाम रिकॉर्ड किए गए डेटा के अनुसार, शहर की वायु गुणवत्ता (AQI) पल-पल खराब हो रही है। मात्र 25 मिनट के अंतराल में प्रदूषण के स्तर में आई भारी बढ़त ने प्रशासन और आम जनता की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
​25 मिनट में 24% की वृद्धि
​लाइव डेटा के अनुसार:
​शाम 7:06 बजे: भागलपुर का AQI 359 (खतरनाक) दर्ज किया गया था।
​शाम 7:33 बजे: मात्र 27 मिनट बाद यह बढ़कर 446 (Hazardous) के स्तर पर पहुँच गया।
​PM2.5 और PM10 की हवा में मौजूद घातक सूक्ष्म कण (PM2.5) का स्तर 298 µg/m³ तक पहुँच गया है, जो सामान्य से कई गुना अधिक है।
​पूरे बिहार से 1.4 गुना ज्यादा प्रदूषित
​डेटा यह भी स्पष्ट करता है कि भागलपुर की स्थिति राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में बहुत खराब है। शाम 7 बजे जहाँ यह राज्य के औसत से 1.2 गुना अधिक था, वहीं रात होते-होते यह 1.4 गुना (40% अधिक) हो गया। इसका मतलब है कि भागलपुर इस समय बिहार के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर है।

क्यों बन रहे हैं ‘गैस चेंबर’ जैसे हालात?

विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
​विंटर स्मॉग और लो इन्वर्जन: सर्दियों में ठंडी हवा भारी होकर जमीन के करीब बैठ जाती है, जिससे धूल और धुएं के कण वायुमंडल में ऊपर नहीं जा पाते।
​निर्माण कार्य और धूल: शहर में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और सड़कों की धूल ने हवा में PM10 के स्तर को बढ़ाया है।
​भौगोलिक स्थिति: गंगा किनारे होने के कारण नमी और धुंध का मिश्रण प्रदूषकों को शहर के ऊपर ही कैद कर देता है।

​सेहत पर सीधा प्रहार: क्या करें और क्या न करें?

जब AQI 400 के पार चला जाता है, तो यह स्वस्थ लोगों के लिए भी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
​बाहर जाने से बचें: खासकर बुजुर्ग, बच्चे और दमा के मरीज सुबह और देर शाम बाहर निकलने से परहेज करें।
​N95 मास्क का प्रयोग: साधारण कपड़े का मास्क इन सूक्ष्म कणों को नहीं रोक सकता, केवल N95 या N99 मास्क ही प्रभावी हैं।
​एयर प्यूरीफायर: घरों के अंदर खिड़की-दरवाजे बंद रखें और संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
​भागलपुर में प्रदूषण का यह स्तर एक “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी” की तरह है। यदि प्रदूषण नियंत्रण के कड़े उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में भारी उछाल आ सकता है।