न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
हास्य-व्यंग्य की साहित्यिक संस्था बगुला मंच की ओर से स्थानीय मोती लाल लेन, सिकंदरपुर, भागलपुर में एक प्रभावशाली काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ. प्रेमचंद पांडेय ने की। मुख्य अतिथि के रूप में कथाकार उमाकांत भारती तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध अधिवक्ता संजय कुमार सिन्हा उपस्थित रहे। संचालन कवि धीरज पंडित ने किया।
गोष्ठी की शुरुआत संजीव कुमार झा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना “सुमिरन करों कर जोड़ी हे मैया शारदा भवानी” से हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
व्यंग्य कवि विनय कबीरा ने समाज की विडंबनाओं पर कटाक्ष करते हुए सुनाया “जिसके लिए लोग लड़ते हैं, उसे तो आपस में कभी लड़ते देखा ही नहीं… ये अजीब सी बात है, लोग समझते ही नहीं…”। उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं।
मुख्य अतिथि उमाकांत भारती ने अपनी रचना“भूख अगर चौखट पर रोये और तिजोरी हंसती हो, तो लोकतंत्र की आत्मा भी चुप रहकर कब तक रोते हो” के माध्यम से समकालीन राजनीति पर तीखा प्रहार किया। वहीं संजय कुमार ने मार्मिक पंक्तियों “भूख बनकर गधा, न घर का रहा न घाट का, और बस इसकी ही खातिर सह गए अपमान सारे”से श्रोताओं को गंभीर चिंतन के लिए विवश कर दिया।
कवि निशांत कुमार ने ओजस्वी स्वर में कहा“सम्राट नहीं मैं सेवक हूं, आघात नहीं मैं सेवक हूं, मैं प्रज्ञान जलाता हूं तम को दाह लगाता हूं”जिसने सभा में ऊर्जा भर दी। संचालक धीरज पंडित की प्रस्तुति “दिन दूनी और रात चौगुनी महंगी हो रही है हाला, अर्ध रोशनी में जगमग है आज विलक्षण मधुशाला” पर भी श्रोताओं ने खूब सराहना की।
अपने उद्बोधन में अधिवक्ता संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि साहित्य समाज का वह आईना है, जो हर व्यक्ति को मानव बनने की प्रेरणा देता है। जहां साहित्य जीवित है, वहीं मानवता भी जीवित रहती है।
इस अवसर पर विनोद कुमार राय, महेश मणि, डॉ. प्रेमचंद पांडेय, कामता प्रसाद सहित कई कवियों ने सामाजिक, राजनीतिक विषयों और वसंत आगमन पर आधारित अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम के अंत में स्वर्गीय कवि महेंद्र मयंक जी को दो मिनट का मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आयोजक कवि निशांत कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ गोष्ठी का विधिवत समापन हुआ।


























