बिहार की सड़कों पर ‘मिशन फाइटर प्लेन’… सामरिक और आर्थिक विकास का नया रनवे

बिहार के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। अब बिहार की सड़कों पर केवल गाड़ियां ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के प्रहरी ‘लड़ाकू विमान’ भी गरजेंगे। केंद्र और राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत बिहार की तीन प्रमुख सड़कों को इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) यानी ‘सड़क रनवे’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर बिहार में किया जा रहा यह प्रयोग राज्य को आधुनिक भारत की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करता है। NHAI और भारतीय वायुसेना का यह साझा प्रयास न केवल बिहार की कनेक्टिविटी सुधारेगा, बल्कि दुश्मन देशों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
जान लीजिए कि किन-किन सड़कों का कायाकल्प होने जा रहा है।
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे: 245 किलोमीटर लंबे इस राज्य के पहले एक्सप्रेस-वे पर सड़क रनवे का निर्माण होगा। (लागत: ₹18,242 करोड़)

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे: 420 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में भी ELF की सुविधा होगी। (लागत: ₹23,434 करोड़)

रामजानकी मार्ग (सीतामढ़ी): नेपाल सीमा के पास भिट्ठामोड़ से नरहिया के बीच हवाई पट्टी विकसित की जाएगी।

इस पहल से होने वाले मुख्य लाभ
सामरिक सुरक्षा (Strategic Security):
बिहार की भौगोलिक स्थिति नेपाल सीमा से सटी हुई है। युद्ध या आपातकालीन स्थिति में यदि वायुसेना के मुख्य एयरबेस (जैसे पूर्णिया या दरभंगा) को क्षति पहुँचती है, तो ये सड़क रनवे ‘बैकअप’ की तरह काम करेंगे। इससे सीमावर्ती इलाकों में भारतीय वायुसेना की पकड़ मजबूत होगी।

आपदा प्रबंधन और आपातकालीन लैंडिंग:
बिहार बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है। एक्सप्रेस-वे पर बनी ये हवाई पट्टियां राहत कार्यों के लिए बड़े मालवाहक विमानों (Airbus) को उतारने में सक्षम होंगी। साथ ही, तकनीकी खराबी वाले नागरिक विमानों के लिए भी ये जीवन रक्षक साबित हो सकते हैं।

उच्च गुणवत्ता वाला इंफ्रास्ट्रक्चर:
सड़क पर लड़ाकू विमान उतारने के लिए सड़क की बनावट सामान्य हाईवे से कहीं अधिक मजबूत होती है।

मजबूती: सड़क के नीचे की जमीन ऐसी बनाई जाती है जो धंस न सके।

बाधा मुक्त: इन हिस्सों पर बिजली के खंभे, मोबाइल टावर या डिवाइडर ऐसे नहीं होते जो विमान के पंखों से टकराएं।

टेक्नोलॉजी: यहाँ पोर्टेबल लाइटिंग सिस्टम और पोर्टेबल एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की व्यवस्था होगी।

आर्थिक विकास की रफ्तार:
जब कोई सड़क ‘एयरबेस’ के मानकों पर बनती है, तो वह सबसे सुरक्षित और तेज होती है। इससे बिहार में लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की लागत कम होगी, जिससे औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।