न्यूनतम मज़दूरी पर हमला बंद करो, 12 फरवरी की हड़ताल में शामिल होंगे सैकड़ों मजदूर

  • लेबर कोड के खिलाफ ऐक्टू का जनसंपर्क अभियान तेज


न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
मजदूर विरोधी चार लेबर कोड्स के खिलाफ 12 फरवरी को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को लेकर ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) का जनसंपर्क अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार को ऐक्टू एवं उससे संबद्ध यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने भागलपुर शहर के विभिन्न इलाकों के साथ-साथ नाथनगर और शाहकुंड प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में मजदूरों के बीच व्यापक संपर्क अभियान चलाया।
इस दौरान कार्यकर्ताओं ने छोटी-छोटी सभाएं एवं बैठकें कर सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों को उजागर किया और मजदूरों से 12 फरवरी की हड़ताल को सफल बनाने की अपील की। “वेतन संहिता 2019 वापस लो”, “चारों लेबर कोड रद्द करो”, “सम्मानजनक मज़दूरी हमारा हक है” जैसे नारों के साथ मजदूरों को संगठित किया गया। बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन एवं असंगठित कामगार महासंघ के कार्यकर्ताओं ने मौके पर पर्चे वितरित कर हड़ताल के समर्थन का आह्वान किया।
अभियान का नेतृत्व ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन के जिला संयुक्त सचिव राजेश कुमार तथा असंगठित कामगार महासंघ की स्थानीय संयोजक कविता देवी ने किया।
भीखनपुर, इशाकचक और लोदीपुर में आयोजित सभाओं को संबोधित करते हुए ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने कहा कि वेतन संहिता 2019 के माध्यम से मजदूरों की न्यूनतम मज़दूरी पर सीधा हमला किया जा रहा है। ‘फ्लोर वेज’ के नाम पर न्यूनतम मज़दूरी को नीचे खींचने और जीवनयापन योग्य मज़दूरी की अवधारणा को खत्म करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि चारों लेबर कोड मजदूरी, काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा पर हमला हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन के जिला संयुक्त सचिव राजेश कुमार ने कहा कि मजदूरों से अब 12 से 16 घंटे तक काम करवाने की व्यवस्था कानूनन लागू की जा रही है, जबकि यूनियन बनाने के अधिकार को लगभग समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लेबर कार्यालय भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के वितरण में खुलेआम रिश्वतखोरी हो रही है। उन्होंने मजदूरों से एकजुट होकर इस मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।
कार्यक्रमों में मीरा देवी, बिंदु भारती, खुशबू देवी, ऊषा देवी, मो. मंसूर, सलमा बेगम, जुगलकुशोर साह, सुमा देवी, पंकज दास, जानकी देवी, गोपाल दास, सीमा देवी, हीरा देवी, पप्पू यादव, सविता देवी, सुरेंद्र महतो, नीलम देवी, किशोरदेव पंडित, दीपक दास, विंदु देवी, पिंकी देवी, रुबी देवी, मो. अफाक, मो. साबिर, ननकी देवी, गुलनिशां खातून, बीबी सोनम, रामदेव सिंह, विनोद तांती, शांति देवी, विनीता देवी, सिकंदर मंडल सहित बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर शामिल हुए।