न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार की राजनीति में रिश्तों और विवादों की एक ऐसी पटकथा लिखी जा रही है, जो किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। इस कहानी के केंद्र में हैं… आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और उनके जीवन में अचानक आए बवंडर का कारण बनीं अनुष्का यादव।
वह एक तस्वीर और बदल गई जिंदगी
कहानी की शुरुआत उस एक वायरल तस्वीर से हुई, जिसने लालू परिवार के ‘लाल’ को उनके ही घर और पार्टी से बेदखल कर दिया। जैसे ही वह तस्वीर सार्वजनिक हुई, सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया। अनुष्का यादव के साथ संबंधों की चर्चा इतनी गहरी हुई कि अनुशासन के लिए मशहूर लालू प्रसाद यादव ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने ट्विटर (X) पर घोषणा की कि तेज प्रताप को परिवार और पार्टी से निष्कासित किया जाता है। एक पल में, बिहार के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक घराने का बड़ा बेटा सड़कों पर आ गया।
नई राह और ‘जनशक्ति’ का संघर्ष
परिवार से टूटने के बाद तेज प्रताप ने हार नहीं मानी। उन्होंने ‘जनशक्ति जनता दल’ का गठन किया। चुनाव के मैदान में उतरे, रैलियां कीं, और यह साबित करने की कोशिश की कि वे अपने दम पर वजूद रखते हैं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। चुनाव के नतीजे आए और तेज प्रताप को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस हार ने न केवल उन्हें कमजोर किया, बल्कि उनके भीतर के आक्रोश को भी बढ़ा दिया।
खामोशी टूटी तो निकले ‘जयचंद’
काफी समय तक चुप रहने के बाद, जब तेज प्रताप ने अपनी चुप्पी तोड़ी, तो उन्होंने अपने करीबियों पर ही तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “पार्टी और परिवार के भीतर कई जयचंद बैठे हैं।” तेज प्रताप का आरोप है कि उन्हें उनके पिता और भाई तेजस्वी से दूर करने के लिए एक गहरी साजिश रची गई। अब उन्होंने सीधे तौर पर कुछ नाम सार्वजनिक कर दिए हैं, जिन्हें वह अपनी इस दुर्दशा का जिम्मेदार मानते हैं। उनका दावा है कि इन ‘जयचंदों’ ने ही उनके खिलाफ माहौल बनाया और उन्हें अपनों की नजरों में गिरा दिया।
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट: कहानी में नया मोड़
लेकिन इस ड्रामे का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब खबर आई कि अनुष्का यादव मां बन गई हैं। मामला तब और गंभीर हो गया जब एक कथित अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट सामने आई, जिसमें पिता की जगह तेज प्रताप यादव का नाम दर्ज होने का दावा किया गया।
तेज प्रताप ने इस पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने अब किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि यह उनकी छवि को पूरी तरह ध्वस्त करने की एक और साजिश है। वह इस मामले को कानूनी रूप से लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अनुष्का की तरफ से उठ रहे सवाल उनकी मुश्किलों को बढ़ा रहे हैं।
उलझी हुई राहें
आज तेज प्रताप यादव एक अजीब कशमकश में हैं। एक तरफ उनका राजनीतिक वजूद खतरे में है, तो दूसरी तरफ ‘पितृत्व’ के दावों ने उनके निजी जीवन को अदालत के दरवाजे पर खड़ा कर दिया है। क्या यह वाकई अपनों की साजिश है या तेज प्रताप के अपने फैसलों का परिणाम? बिहार की जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद कौन सा नया मोड़ लेता है।


























