पश्चिम बंगाल की सत्ता से ममता बनर्जी को बेदखल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सबसे मारक ‘राजनीतिक फौज’ मैदान में उतार दी है। स्टार प्रचारकों की इस नई फेहरिस्त में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम शामिल होना महज एक संयोग नहीं, बल्कि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा दिया गया एक बड़ा कूटनीतिक संदेश है।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बंगाल के चुनावी दंगल में बिहार से इकलौते बड़े चेहरे के तौर पर सम्राट चौधरी को तवज्जो मिलना यह साफ करता है कि दिल्ली के गलियारों में उनका ‘राजनीतिक वजन’ अब उस ऊंचाई पर पहुंच चुका है, जहां से भविष्य के बिहार की कमान उन्हें सौंपी जा सके। यह नियुक्ति इस बात की तस्दीक है कि बीजेपी अब सम्राट चौधरी को केवल बिहार का नेता नहीं, बल्कि हिंदी पट्टी के एक कद्दावर ओबीसी योद्धा के रूप में ब्रांड कर रही है।
बंगाल के इस ‘मिशन 2026’ में सम्राट चौधरी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बिहार और बंगाल की साझा सीमाएं, सांस्कृतिक समानताएं और सीमावर्ती जिलों में रहने वाले लाखों बिहारी मतदाताओं के बीच सम्राट की अपील पार्टी के लिए ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हो सकती है। मालदा, दिनाजपुर और आसपास के इलाकों में जहां हिंदी भाषी और ओबीसी वर्ग का प्रभाव है, वहां सम्राट चौधरी का आक्रामक अंदाज ममता बनर्जी के ‘तृणमूल मॉडल’ को कड़ी टक्कर देने की क्षमता रखता है। बीजेपी जानती है कि सम्राट की भाषण शैली और विपक्ष पर सीधा प्रहार करने का हुनर बंगाल के चुनावी ध्रुवीकरण में पार्टी को बढ़त दिला सकता है।
बिहार के हालिया सियासी समीकरणों पर नजर डालें तो सत्ता की धुरी तेजी से बदल रही है। नीतीश कुमार के साथ सरकार चलाने के बावजूद बीजेपी अपनी स्वतंत्र जमीन तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। सम्राट चौधरी को बंगाल जैसे प्रतिष्ठित चुनावी मोर्चे पर सेनापति बनाकर आलाकमान ने बिहार के कार्यकर्ताओं को यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि आगामी विधानसभा चुनावों के बाद ‘पावर ट्रांसफर’ की सुगबुगाहट अब हकीकत में बदल सकती है। सम्राट का बढ़ता कद यह भी बताता है कि बीजेपी अब बिहार में ‘पिछलग्गू’ के बजाय ‘अग्रणी’ भूमिका में आने के लिए पूरी तरह तैयार है और इसके लिए सम्राट चौधरी ही उनके सबसे भरोसेमंद सारथी हैं।
इस पूरी रणनीति के पीछे संगठनात्मक मजबूती का एक और सिरा जुड़ा है। सम्राट चौधरी के साथ-साथ मंगल पांडेय और नितिन नवीन जैसे अनुभवी नेताओं को प्रचार की कमान सौंपकर बीजेपी ने एक मजबूत ‘बिहार कोर टीम’ बंगाल भेजी है। यह टीम न केवल वहां के हिंदी भाषियों को एकजुट करेगी, बल्कि ‘डबल इंजन सरकार’ के विकास मॉडल को बंगाल की जनता के सामने रखेगी। 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले सम्राट चौधरी की ताबड़तोड़ रैलियां यह तय करेंगी कि बंगाल में बीजेपी का परचम लहराएगा या नहीं, लेकिन एक बात तय है कि इस चुनावी शोर के बीच सम्राट चौधरी का नाम बिहार के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर और भी मजबूती से उभरेगा।
































