बिहार चुनाव परिणाम : क्यों पहले से साफ दिख रहा था महागठबंधन का कमजोर प्रदर्शन?

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना

चुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि जिस राजनीतिक परिदृश्य की आशंका पहले से जताई जा रही थी, वही अंततः सच साबित हुआ। महागठबंधन पूरे चुनावी अभियान के दौरान रणनीतिक एकजुटता दिखाने में नाकाम रहा, जबकि एनडीए ने अपने मुद्दों और संगठनात्मक संरचना को तेजी से मजबूत किया।
सबसे पहले, महागठबंधन की अंदरूनी असहमति ने पूरे चुनाव को प्रभावित किया। कांग्रेस और राजद के बीच शुरू से ही तालमेल की कमी दिखाई दी, चाहे वह राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की संयुक्त यात्राएँ हों या टिकट बंटवारे का मुद्दा। राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के बाद तेजस्वी का अकेले यात्रा निकालना इस सहयोग की कमी को और उजागर करता है। इसके बाद तेजस्वी द्वारा खुद को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए जाने की मांग और कांग्रेस का दबाव में आकर इसे स्वीकार कर लेना भी रणनीतिक मजबूरी का संकेत था। वहीं वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी द्वारा खुद को डिप्टी सीएम फेस घोषित करने की कोशिश ने गठबंधन के भीतर मकसद की एकरूपता को कमजोर किया।
दूसरी ओर, एनडीए की रणनीति कहीं अधिक संगठित और आक्रामक दिखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जंगलराज, सुरक्षा, घुसपैठ और शासन स्थिरता जैसे पुराने लेकिन असरदार मुद्दों को फिर से उठाया। खासकर अमित शाह ने बिहार में लगातार कैंप कर माइक्रो लेवल तक मैनेजमेंट संभाला। असंतुष्ट नेताओं से सीधे संवाद, सीट-वार समीकरणों की निगरानी और स्थानीय फीडबैक के आधार पर त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ने एनडीए को बढ़त दिलाई।
इस बीच कांग्रेस और राजद का एसआईआर जैसे मुद्दों पर फोकस जनता के साथ तालमेल नहीं बैठा पाया। राहुल गांधी का लंबे समय तक बिहार से दूर रहना और महागठबंधन का एक सुसंगत कथा पेश न कर पाना भी मतदाताओं की धारणा पर असर डालता रहा।
कभी बिहार की सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस अपना पुराना जनाधार वापस पाने में असफल रही और राजद के नेतृत्व पर अत्यधिक निर्भर दिखी। टिकट बंटवारे में तालमेल की विफलता ने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ाया, जिसका सीधा असर सीटों पर पड़ा।
कुल मिलाकर, महागठबंधन की रणनीतिक कमजोरियाँ, नेतृत्व की अस्पष्टता और कैडर स्तर पर समन्वय की कमी चुनावी हार का सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आईं, जबकि एनडीए ने जमीनी स्तर पर संगठन, नेतृत्व और मुद्दों की धार को लगातार बनाए रखा।