भागलपुर में गंगा ने बदला रूप, मोहल्लों में घुसा पानी, स्कूलों में छुट्टी

गंगा के बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों में घुसा पानी, स्कूल जाने में हो रही परेशानी

न्यूज स्कैन ब्यूरो। भागलपुर 

 गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण भागलपुर जिले के निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। सबौर प्रखंड के रजनदीपुर, मोदीनगर और संतनगर जैसे मोहल्लों की मुख्य सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़कों पर घुटने से ऊपर तक पानी भर गया है। इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। घरों में भी सीलन और नमी का असर दिखने लगा है। खासतौर पर सुबह-शाम काम पर जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों के लिए हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।

स्कूलों में छुट्टी, पढ़ाई पर संकट

बुधवार को संतनगर प्राथमिक विद्यालय ने जलभराव को देखते हुए समय से पहले छुट्टी कर दी। मोदीनगर जैसे इलाकों के बच्चों का स्कूल आना-जाना मुश्किल हो गया है, क्योंकि वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है। विद्यालय प्रशासन के मुताबिक लगातार पानी बढ़ने के कारण अब कई बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।

मोदीनगर निवासी दिलीप मंडल ने बताया, “अगर यही स्थिति बनी रही, तो बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो जाएगी। प्रशासन को तत्काल राहत के कदम उठाने चाहिए।”
वहीं छात्र रोहित कुमार ने कहा, “हम रोज स्कूल पैदल जाते थे, लेकिन अब रास्ते में पानी भर गया है। जूते-कपड़े भीग जाते हैं और कई बार फिसल जाते हैं। अब स्कूल नहीं जा पा रहे।”

हर घंटे एक सेंटीमीटर बढ़ रहा जलस्तर

केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा का जलस्तर हर घंटे औसतन एक सेंटीमीटर की दर से बढ़ रहा है। यदि यही गति बनी रही, तो सबौर के और भी कई मोहल्ले और गांव इसकी चपेट में आ सकते हैं।

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से नाव या ट्रैक्टर जैसी वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था की मांग की है, ताकि बच्चों को स्कूल और लोगों को जरूरी कार्यों के लिए बाहर जाने में सुविधा मिल सके।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

हालांकि स्थिति गंभीर होती जा रही है, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस राहत व्यवस्था नहीं की गई है। न नाव चलाई गई है, न ही किसी अधिकारी की तैनाती की गई है। लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं और अब प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।