
बिहार में एक बड़े फर्जीवाड़ा नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने पहचान पत्र जारी करने वाली व्यवस्था में मौजूद गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। मुजफ्फरपुर के एक फर्जी आधार सेंटर पर छापेमारी के दौरान पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पटना के एक अधिकृत कर्मी के लॉगिन और पासवर्ड का इस्तेमाल कर धड़ल्ले से बांग्लादेशी और अफगानी नागरिकों के आधार कार्ड बनाए जा रहे थे। यह पूरा मामला केवल धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
मुजफ्फरपुर के मोतीझील स्थित श्यामनंदन रोड पर कन्हाई मिश्रा द्वारा एक फर्जी आधार केंद्र संचालित किया जा रहा था। नगर थाने की पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर इस केंद्र पर छापेमारी की और मौके से लैपटॉप, फिंगर प्रिंट रीडर, आधार, राशन कार्ड सहित कई अन्य कागजात जब्त किए। एसडीपीओ नगर-एक सुरेश कुमार ने बताया कि इस फर्जी केंद्र पर इस्तेमाल होने वाला लॉगिन और पासवर्ड पटना के बोरिंग कैनाल रोड स्थित एक बैंक में संचालित आधार सेंटर का था।
फर्जीवाड़े का ‘ऑपरेशनल मॉडल’
यह पूरा तंत्र पैसों के लालच और तकनीकी खामियों के दुरुपयोग पर टिका था। पटना के बोरिंग कैनाल रोड स्थित बैंक में ‘वी टेक्नोलॉजी एजेंसी’ का कर्मी शिवकुमार पंडित काम करता था। शिवकुमार ने अपनी यूआईडीएआई (UIDAI) मशीन, सॉफ्टवेयर लॉगिन और पासवर्ड फर्जी आधार सेंटर संचालकों को दे रखा था। जब भी फर्जी सेंटर पर ‘आधार इनरॉलमेंट क्लाइंट सॉफ्टवेयर’ में लॉगिन किया जाता, तो ओटीपी शिवकुमार के मोबाइल पर जाता था। शिवकुमार कॉल के जरिए वह ओटीपी फर्जी संचालक को बता देता था, जिससे सिस्टम में प्रवेश मिल जाता था। आशंका जताई जा रही है कि पिछले तीन सालों से इसी लॉगिन के जरिए यह गोरखधंधा चल रहा था, जिसमें सैकड़ों फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने का अंदेशा है।
गृह मंत्रालय के अलर्ट के बावजूद सक्रिय था नेटवर्क
इस मामले का सबसे संवेदनशील और डरावना पहलू यह है कि नेपाल सीमा के इलाकों में सक्रिय एजेंट इन फर्जी आधार कार्डों के जरिए बांग्लादेशी और अफगानी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट तक बनवा रहे थे। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले ही नेपाल बॉर्डर से सटे जिलों में फर्जी आधार बनाने वाले गिरोहों को लेकर अलर्ट जारी कर चुका है। अलर्ट के बावजूद इस तरह के राष्ट्रविरोधी नेटवर्क का तीन साल तक सक्रिय रहना सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस ने इस मामले में पटना के आधार सेंटर कर्मी शिवकुमार को छपरा से गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरपुर में पहले भी इसी नेटवर्क से जुड़े दो अन्य फर्जी आधार सेंटरों का खुलासा हो चुका है, और अब पटना की एजेंसी के संबंध में भी सघन जांच की जा रही है ताकि इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ा जा सके।































