न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
चार लेबर कोड सहित केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों के विरोध में आहूत देशव्यापी आम हड़ताल का भागलपुर में व्यापक असर देखने को मिला। विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और श्रमिक संगठनों के आह्वान पर सैकड़ों संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के मजदूरों ने शहर में जुलूस निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया।
हड़ताल में शामिल मजदूर स्थानीय स्टेशन चौक पर एकत्र हुए, जहां से झंडे, बैनर और मांग-पट्टिकाओं के साथ जुलूस निकाला गया। जुलूस मुख्य बाजार, खलीफाबाग, घंटाघर चौक और बड़ी पोस्टऑफिस होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा। कलेक्ट्रेट परिसर में सभा आयोजित कर मजदूरों ने अपनी मांगों से संबंधित संयुक्त स्मारपत्र जिला पदाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को प्रेषित किया।
संयुक्त नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन
जुलूस–प्रदर्शन का नेतृत्व ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, सीटू के जिला सचिव दशरथ प्रसाद, एटक के जिला महासचिव डॉ. सुधीर शर्मा, इंटक के जिला अध्यक्ष ई. रवि कुमार, सेवा की जिला अध्यक्ष उजरा बानो तथा एआईयूटीयूसी के जिला संयोजक दीपक कुमार ने संयुक्त रूप से किया।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शन में भाग लेकर समर्थन दिया। एआईकेएम के जिला अध्यक्ष महेश प्रसाद यादव, बीआरकेएस के जिला संयोजक भोला प्रसाद यादव तथा एआईकेएस के जिला सचिव उपेन्द्र यादव के नेतृत्व में किसानों की भागीदारी रही।
लेबर कोड पर उठाए सवाल
सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने कहा कि नए लेबर कोड मजदूरों के कानूनी अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इन प्रावधानों से काम के घंटे बढ़ने, न्यूनतम मजदूरी और श्रमिक संगठनों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। वक्ताओं ने सरकार से लेबर कोड पर पुनर्विचार करने और व्यापक संवाद की मांग की। नेताओं ने महंगाई, बेरोजगारी तथा मनरेगा से जुड़े मुद्दों को भी उठाया और कहा कि श्रमिकों को रोजगार की गारंटी और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
किसानों ने भी जताई चिंता
संयुक्त किसान मोर्चा के वक्ताओं ने हालिया कृषि एवं व्यापार नीतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने की आवश्यकता है और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बड़ी संख्या में श्रमिकों की भागीदारी
प्रदर्शन में ऐक्टू, एटक, सीटू, सेवा, इंटक सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए। निर्माण क्षेत्र और अन्य असंगठित क्षेत्रों के महिला–पुरुष श्रमिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। सभा के अंत में नेताओं ने कहा कि श्रमिकों और किसानों के मुद्दों पर लोकतांत्रिक ढंग से संघर्ष जारी रहेगा।


























