न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना/जहानाबाद
बिहार की राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई नीट (NEET) छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब सुलझने के बजाय और उलझता दिख रहा है। राज्य सरकार द्वारा मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने की सिफारिश के बावजूद, बिहार पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) की सक्रियता ने कई कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
आधी रात का ड्रामा और परिजनों का आक्रोश
जहानाबाद में मृतका के घर और उनके रिश्तेदारों के यहाँ सोमवार देर रात एसआईटी की दस्तक ने हड़कंप मचा दिया। परिजनों का आरोप है कि एसआईटी अधिकारी ‘DNA सैंपल’ के लिए जबरन नोटिस थमा रहे हैं। ग्रामीणों के कड़े विरोध के बाद टीम को बैरंग वापस लौटना पड़ा, लेकिन इस घटना ने पुलिस की मंशा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
CBI बनाम SIT:
ये कानूनी पेच है या मामले को भटकाने की कोशिश? 31 जनवरी को राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस कांड की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। विधानसभा में भी इसकी पुष्टि की गई। ऐसे में सवाल उठता है कि, जब केस केंद्रीय एजेंसी के सुपुर्द हो चुका है, तो एसआईटी साक्ष्य जुटाने के नाम पर इतनी सक्रिय क्यों है? क्या एसआईटी की यह कार्रवाई सीबीआई की संभावित जांच की दिशा को पहले ही प्रभावित करने की कोशिश है? परिजनों का आरोप है कि उन्हें ‘अपमानित’ करने और मामले को दबाने के लिए यह दबाव बनाया जा रहा है।
अस्पताल से हॉस्टल तक, सवालों के घेरे में प्रशासन
6 जनवरी को छात्रा अचेत मिली और 11 जनवरी को अस्पताल में उसकी मौत हो गई। यौन उत्पीड़न के आरोपों और हॉस्टल कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद से ही पुलिस की थ्योरी संदिग्ध रही है। अब परिजनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) हो, क्योंकि उन्हें राज्य पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं रहा।
पटना पुलिस के आला अधिकारियों की इस मामले पर चुप्पी और एसआईटी की ‘देर रात वाली कार्रवाई’ ने मामले को और ज्यादा रहस्यमयी बना दिया है। सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में वैज्ञानिक जांच का हिस्सा है या सीबीआई के आने से पहले फाइलों को अपनी सुविधा के अनुसार बंद करने की जल्दबाजी?

























