न्यूज स्कैन ब्यूरो, कैमूर
भभुआ शहर के वार्ड संख्या 19 में हाई टेंशन बिजली तार लोगों के लिए खतरे का सबब बन गया है। 11 हजार वोल्ट का बिना कवर लटका हुआ बिजली तार रिहायशी इलाके से बेहद नजदीक गुजर रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में भारी दहशत है। नगरवासियों का कहना है कि इसी तार की चपेट में आकर पूर्व में एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है, बावजूद इसके अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे कई बार बिजली विभाग और प्रशासन को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नगरवासी मांग कर रहे हैं कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बिजली के तार और पोल को दूसरे सुरक्षित रूट से ले जाया जाए, ताकि रिहायशी इलाके को इस खतरे से मुक्त किया जा सके।
बिजली विभाग और स्थानीय लोगों में तनातनी
इस पूरे मामले पर बिजली विभाग का कहना है कि फिलहाल तार की ऊंचाई बढ़ाने और कवर लगाने का कार्य प्रस्तावित किया गया था। इसके लिए जब विभागीय कर्मी मौके पर पहुंचे, तो स्थानीय लोगों ने कार्य रोक दिया। इसे लेकर भभुआ थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ आवेदन भी दिया गया है।
बिजली विभाग के अनुसार, अगर तार को दूसरे रूट से शिफ्ट किया जाता है तो इसके लिए पांच से छह लाख रुपये तक का खर्च आएगा, जिसके लिए विभागीय स्तर पर प्रोजेक्ट भेजा गया है। विभाग का कहना है कि जब तक उच्च स्तर से स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक तार को ऊपर करने और कवर लगाने का ही विकल्प उपलब्ध है।
नगरवासियों की पीड़ा
स्थानीय निवासी त्रिभुवन पटेल, अंजनी कुमार और लक्ष्मीना देवी ने बताया कि वर्षों से यह हाई टेंशन तार घरों के ऊपर से लटका हुआ है। पहले भी एक मासूम की जान जा चुकी है, इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग दूसरे रूट से तार ले जाने के नाम पर पांच लाख रुपये से अधिक खर्च बता रहा है, लेकिन लोगों की जान की कीमत क्या पैसों से कम है?
नगरवासियों का कहना है कि वे मौत के साए में जीवन जीने को मजबूर हैं और किसी बड़े हादसे के इंतजार में प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
बिजली विभाग का पक्ष
भभुआ बिजली विभाग के जेई रमाकांत सिंह ने बताया कि मामला वार्ड संख्या 19 का है, जहां 11 हजार वोल्ट का तार बेहद नजदीक है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा तार को और ऊंचा करने तथा कवर लगाने के लिए कर्मियों को भेजा गया था, लेकिन स्थानीय लोगों ने कार्य नहीं करने दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कार्य में बाधा पहुंचाई जाएगी और भविष्य में कोई हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी स्थानीय लोगों की होगी। जेई ने यह भी बताया कि दूसरे रूट से पोल और तार शिफ्ट करने का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है, जिसमें करीब पांच लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। स्वीकृति मिलते ही तार को दूसरे रास्ते से शिफ्ट कर दिया जाएगा।
फिलहाल वार्ड 19 के लोग प्रशासन और बिजली विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था जागेगी, या समय रहते लोगों की जान की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।

























