न्यूज स्कैन ब्यूरो, कैमूर
जिले में फाइलेरिया (लिम्फैटिक फाइलेरियासिस) उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक अभियान की शुरुआत कर दी है। इस अभियान के तहत जिले के 13,01,509 लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य फाइलेरिया संक्रमण को जड़ से समाप्त करना है।
अभियान के तहत स्वास्थ्यकर्मी और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र लोगों को दवा उपलब्ध कराएंगे। इसके साथ ही विभिन्न स्थानों पर बूथों के माध्यम से भी दवा सेवन की व्यवस्था की गई है। लोगों को डीईसी (DEC) और अल्बेंडाजोल जैसी फाइलेरिया रोधी दवाएं दी जाएंगी।
इस संबंध में जानकारी देते हुए कैमूर के सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को लगाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रूप से बीमार लोग इस दवा का सेवन नहीं करेंगे।
सिविल सर्जन ने बताया कि दवा सेवन के बाद किसी गंभीर दुष्प्रभाव की आशंका नहीं है, फिर भी किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम को तैयार रखा गया है।
27-28 फरवरी तक चलेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह अभियान 10 फरवरी से 27-28 फरवरी तक चलाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य फाइलेरिया के संक्रमण को रोकना और भविष्य में कैमूर जिले को पूरी तरह फाइलेरिया मुक्त बनाना है। लोगों को जागरूक करने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्यशालाएं और प्रचार गतिविधियां भी आयोजित की गई हैं।
डॉ. रजक ने बताया कि फाइलेरिया रोग विषैले मच्छरों के काटने से फैलता है, जिसे रोकने के लिए यह दवा अत्यंत प्रभावी है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे बिना किसी डर के दवा का सेवन करें, क्योंकि इसका कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं है। हालांकि इस वर्ष बिहार राज्य में करोड़ों लोगों को दवा वितरण का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन कैमूर जिले के भभुआ, मोहनिया और दुर्गावती क्षेत्रों में यह अभियान संचालित नहीं किया जाएगा।

























