बिहार में नए जिलों और अनुमंडलों को लेकर सरकार ने कहा, अभी कोई फैसला नहीं… जानिए क्यों नहीं बन रहे नए जिले और अनुमंडल

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में नए जिले,अनुमंडल या प्रखंड बनाने की मांग कर रहे जनप्रतिनिधियों को सरकार की ओर से फिलहाल ‘इंतजार’ करने का संकेत मिला है। बिहार विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में नए प्रशासनिक गठन का वर्तमान में कोई तात्कालिक प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, इस घोषणा के साथ ही राज्य में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण (Administrative Decentralization) की जरूरत और इसके फायदों पर बहस तेज हो गई है।

सरकारी रुख: क्यों नहीं बन रहे नए जिले और अनुमंडल?
सदन में सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए विजय चौधरी ने बताया कि नए जिले या अनुमंडल का गठन कोई राजनीतिक घोषणा मात्र नहीं, बल्कि एक जटिल कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया है।

अनुशंसा का अभाव: अब तक किसी भी जिले के डीएम (DM) या एसपी (SP) की ओर से मुख्यालय को ऐसा कोई ठोस प्रस्ताव नहीं भेजा गया है, जिसे प्रमंडलीय आयुक्त और डीआईजी का अनुमोदन प्राप्त हो।

प्रक्रियात्मक जटिलता: सरकार का तर्क है कि जब तक जमीनी स्तर से प्रशासनिक आवश्यकता की रिपोर्ट नहीं आएगी, तब तक मुख्यालय स्तर पर निर्णय लेना संभव नहीं है।

समिति की समीक्षा: प्रस्ताव मिलने के बाद भी सचिवों की समिति और फिर मंत्रियों का समूह इसकी समीक्षा करता है। फिलहाल यह प्रक्रिया किसी भी नए क्षेत्र के लिए शुरू नहीं हुई है।

क्यों जरूरी है नए प्रशासनिक केंद्रों का गठन?
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे सघन आबादी वाले राज्य में, जहां कुछ जिलों की जनसंख्या कई छोटे देशों से भी अधिक है, नए जिले और अनुमंडल बनाना ‘सुशासन’ के लिए अनिवार्य है।

  1. शासन की जनता तक सीधी पहुंच
    वर्तमान में कई गांवों की दूरी जिला मुख्यालय से इतनी अधिक है कि एक छोटे से काम (जैसे- जमीन का मोटेशन या शिकायत दर्ज करना) के लिए नागरिक को पूरा दिन सफर में बिताना पड़ता है। नए अनुमंडल बनने से प्रशासनिक मशीनरी जनता के करीब पहुंचती है।
  2. बेहतर कानून-व्यवस्था (Law & Order)
    एक छोटे भौगोलिक क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन की पकड़ मजबूत होती है। पुलिस जिला या नए अनुमंडल बनने से अपराध नियंत्रण और त्वरित रिस्पांस टीम (QRT) की कार्यक्षमता बढ़ जाती है।
  3. शहरीकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति
    जब कोई क्षेत्र अनुमंडल या जिला घोषित होता है, तो वहां आधारभूत संरचना (Infrastructure) का विकास होता है। नए कार्यालय, अस्पताल, बैंक और बाजार खुलते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और ग्रामीण इलाकों का शहरीकरण होता है।

बिहार के इन हिस्सों में उठ रही है मांग
विधानसभा में उठ रही मांगें बिहार की भौगोलिक और प्रशासनिक विसंगतियों को दर्शाती हैं:

अररिया (जोकीहाट): यहां के विधायक ने चार प्रखंडों (जोकीहाट, पलासी, सिकटी और कुर्साकांटा) को मिलाकर नए अनुमंडल की मांग की। इसका मुख्य कारण भौगोलिक दूरी और बाढ़ जैसी आपदाओं के समय मुख्य जिला मुख्यालय से संपर्क टूटना है।

मुजफ्फरपुर (सरैया और सकरा): मुजफ्फरपुर बिहार के सबसे व्यस्त जिलों में से एक है। यहां की विशाल आबादी को देखते हुए सरैया और सकरा को अनुमंडल बनाना प्रशासनिक बोझ कम करने के लिए आवश्यक माना जा रहा है।

अन्य क्षेत्र: बगहा, बाढ़, नवगछिया और झंझारपुर जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से पूर्ण जिला बनाने की मांग हो रही है ताकि विकास की गति को तेज किया जा सके।

आगे की राह
यदि सरकार भविष्य में इन प्रस्तावों पर आगे बढ़ती है, तो यह बिहार के ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ का लाभ उठाने और समावेशी विकास (Inclusive Growth) की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। हालांकि, इसके लिए भारी वित्तीय बजट और नए पदों के सृजन की आवश्यकता होगी, जो राज्य के खजाने पर असर डालेगा। फिलहाल, गेंद जिला प्रशासनों के पाले में है—जब तक वे अनुशंसा नहीं भेजते, तब तक ये मांगें केवल सदन की फाइलों तक सीमित रहेंगी।