समस्त प्रकार के नरक से बचाती है नरक निवारण चतुर्दशी-आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र

न्यूज स्कैन ब्यूरो, सुपौल

माघ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी यानी 17 जनवरी को प्रदोष 14 व्रतम तथा नरक निवारण चतुर्दशी व्रत होगा ।इसमें भगवान शिव के पूजन और उपवास की प्रधानता है। आचार्य पंडित धर्मेंद्र नाथ मिश्र ने बताया कि नरक निवारण चतुर्दशी के दिन व्रत उपवास कर भगवान शिव का अभिषेक विधिवत धूप दीप नैवेद्य आदि से पूजन करने से 1000 अश्वमेध यज्ञ के फल प्राप्त होते है। इसी दिन कुशेश्वर कपिलेश्वर भगवान शिव की प्रतिष्ठा का दिवस भी है। नरक निवारण चतुर्दशी , जैसा कि नाम से ही पता है जो इस चतुर्दशी के व्रत और शिव की उपवास करते है उन सभी मनुष्यों का नरक में भोग नहीं होता है। नर्क में वास नहीं होता है। शिवपूजन में प्रातः काल संकल्प लेकर के व्रत रखें और समस्त प्रकार के तापों से मुक्ति के लिए व्रत का संकल्प करें, और शिवपूजन में गंगाजल, अक्षत, तील यब ,पंचामृत दूध ,दही, घी, मधु, गुड़ आदि से तथा आक का पुष्प, बिल्लपत्र ,धतूरा, पुष्प के द्वारा धूप, दीप, नैवेद्य आदि के द्वारा भगवान शिव का पूजन करें तथा शिव सहस्त्रनामावली का पाठ करें। इससे समस्त प्रकार के मनोरथ, पूर्ण फलों की प्राप्ति हो जाती है।