किशनगंज से सनसनीखेज मामला-दहेज हत्या में पति को उम्रकैद

न्यूज स्कैन ब्यूरो, किशनगंज

जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशांत कुमार की अदालत ने शुक्रवार को दहेज हत्या के एक बहुचर्चित मामले में आरोपी पति रब्बानी आलम (खासडांगी, बहादुरगंज) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाने), 498ए (दहेज प्रताड़ना) और दहेज निषेध अधिनियम के तहत कुल 14 हजार रुपये जुर्माना सहित अलग-अलग सजाएं सुनाईं, जो एक साथ चलेंगी।
यह मामला 1 नवंबर 2022 का है। मृतका निसरत जहां (22) की शादी कुछ महीने पहले ही रब्बानी आलम से हुई थी। शादी के बाद ही ससुराल पक्ष ने मोटरसाइकिल और तीन लाख रुपये नकद की मांग शुरू कर दी।
दहेज न मिलने पर निसरत को लगातार प्रताड़ित किया जाता था। मायके आकर वह अक्सर रोते हुए अपनी पीड़ा बयान करती थी।
गला दबाकर हत्या, फिर सबूत मिटाने की कोशिश
घटना वाली रात दहेज के लिए हुए विवाद के बाद रब्बानी ने निसरत की गला दबाकर हत्या कर दी और शव को घर से करीब आठ किलोमीटर दूर सिंथिया–कुलामनी नहर में फेंक दिया।
कई दिनों तक बेटी के नहीं लौटने पर परिजनों ने सदर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। बाद में नहर से बरामद शव की पहचान निसरत के रूप में की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गला घोंटना पाया गया।
तेजी से चली सुनवाई, 12 गवाहों ने दी गवाही
मृतका की मां अंजुमा खातून ने सदर थाना कांड संख्या 432/22 के तहत मामला दर्ज कराया था। वाद संख्या 49/2023 में लोक अभियोजक प्रणव कुमार ने 12 गवाहों को प्रस्तुत किया।
गवाही के दौरान मृतका के माता-पिता, भाई-बहन और पड़ोसी भावुक हो उठे। फैसला सुनाते हुए जज सुशांत कुमार ने कहा—“दहेज जैसी कुप्रथा ने एक नवविवाहिता की जिंदगी छीन ली। समाज को कड़ा संदेश देने की जरूरत है।”
परिजनों की आंखों में आंसू, पर मिली राहत
मृतका के पिता मोहम्मद इमरान ने कहा—“बेटी तो वापस नहीं आएगी, लेकिन इंसाफ मिला है। दहेज के लालची हैवानों को सबक मिलेगा।”
मां अंजुमा खातून बोलीं—“मेरी बेटी की चीखें अब शांत हो गईं।”
संगठनों ने फैसले का स्वागत किया
सामाजिक संगठनों ने कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत और आवश्यक संदेश है।