भागलपुर: ईंट भट्ठा मालिकों का ‘राज’! गंगा पर अवैध रास्ता बनाकर रोका पानी- दो हज़ार एकड़ भूमि डूबी, हजारों किसान बर्बादी के कगार पर

मदन, भागलपुर

जिले के कहलगांव, गोराडीह, सबौर और सन्हौला प्रखंडों के हजारों किसान गहरी संकटग्रस्त स्थिति से जूझ रहे हैं। आरोप है कि इलाके के ईंट-भट्ठा मालिकों ने गंगा नदी पर अवैध तरीके से कच्चे रास्ते बना दिए हैं, जिससे बाढ़ का पानी अब तक निकासी नहीं पा सका है।
इस जलजमाव ने करीब दो हज़ार एकड़ उपजाऊ जमीन को डुबो रखा है और किसान दलहन फसलों की बुआई तक नहीं कर पा रहे हैं।

40 से अधिक स्थानों पर गंगा को पाटा गया!

स्थानीय लोगों के अनुसार, भट्ठा मालिक गंगा के किनारे भट्ठा चलाते हैं और कच्ची ईंट बनाने के लिए नदी पार खेतों का इस्तेमाल करते हैं।
ईंटें भट्ठा तक पहुंचाने के लिए उन्होंने नदी के भीतर ही करीब 40 जगहों पर बांधनुमा रास्ते बना दिए, जिससे नदी की धारा और निकासी का पूरा स्वरूप बिगड़ गया है।
इन अवैध बांधों ने बाढ़ के पानी को बाहर निकलने नहीं दिया और परिणामस्वरूप किसानों के खेत आज भी पानी में पड़े सड़ रहे हैं। जो खेत आज दलहन फसल से लहलहाने चाहिए थे, वे अब तालाब में बदल गए हैं।

किसानों का आरोप: पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं

क्षेत्रवासियों और किसानों का यह भी आरोप है कि ईंट भट्ठा मालिकों की पहुंच इतनी मजबूत है कि उनके खिलाफ पुलिस और प्रशासन तक कार्रवाई नहीं कर रहा।
किसानों के अनुसार—“हम हर साल अधिकारियों के दफ्तर का चक्कर लगाते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागज़ी खानापूर्ति होती है। अवैध रास्ते हटाने की हिम्मत किसी में नहीं।”

हाईकोर्ट का आदेश भी ‘कागज़ों में कैद’

समस्या नई नहीं है। वर्ष 2022 में किसानों ने मजबूर होकर पटना हाईकोर्ट में CWJC 6159/2022 के तहत याचिका भी दायर की थी। हाईकोर्ट ने तत्कालीन डीएम भागलपुर को कार्रवाई का आदेश दिया था, लेकिन आज तक नदी में बनाए गए अवैध रास्ते नहीं हटाए गए। नतीजतन, गंगा का पानी खेतों में ही कैद है और किसान गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं।

प्रशासन पत्राचार करके भूला— SDO ने BDO व CO को दी 48 घंटे में रिपोर्ट की चेतावनी दी थी

लगातार विरोध, शिकायतों और खेतों में जलमग्न स्थिति के बाद करीब सालभर पहले अनुमंडल पदाधिकारी, सदर भागलपुर ने प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी से कहा था कि 48 घंटे के भीतर स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट दें और समाधान सुनिश्चित करें। लेकिन स्थिति अब भी जस की तस है।

किसानों की मांग: अवैध बांध तोड़कर गंगा का प्राकृतिक प्रवाह तुरंत बहाल किया जाए

किसान चेतावनी दे रहे हैं कि यदि गंगा के भीतर बनाए गए अवैध रास्ते तुरंत नहीं हटाए गए, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
क्षेत्र के किसान साफ कहते हैं—“हमारी जमीन, हमारी फसलें, हमारा भविष्य बरबाद हो रहा है। प्रशासन कार्रवाई करे, वरना आंदोलन होगा।”