गठबंधन में अफरा-तफरी सिर्फ सीटों की नहीं, यह लोकतंत्र के प्रबंधन की विफलता है – राजेश मिश्रा

न्यूज़ स्कैन ब्यूरो | पूर्णिया
विद्या विहार रेसिडेंशियल स्कूल के सचिव और प्रख्यात शिक्षाविद राजेश मिश्रा ने बिहार विधानसभा चुनाव के संदर्भ में मौजूदा राजनीतिक हालात पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “कई सालों का समय मिलता है दलों को अपनी हिस्सेदारी तय करने के लिए, सही उम्मीदवारों की पहचान करने के लिए और जनता से जुड़ने के लिए। लेकिन पहले चरण के मतदान से कुछ ही दिन पहले सभी दलों में अफरा-तफरी मची हुई है। यह लोकतंत्र की गहराई में बैठे अव्यवस्था और अनैतिकता का प्रमाण है।”
राजेश मिश्रा ने कहा कि आज लगभग हर राजनीतिक गठबंधन में असंतोष उभर रहा है। उन्होंने कहा, “दल एक-दूसरे से नाराज हैं, कार्यकर्ता उपेक्षित हैं, और टिकटों की खरीद-फरोख्त जैसे आरोप खुलेआम लग रहे हैं। कुछ नेता अपनी पार्टी छोड़ रहे हैं, तो कुछ अपने ही नेताओं के खिलाफ मैदान में उतरने को तैयार हैं। यह स्थिति किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।”
उनके अनुसार, जब राजनीतिक दल चुनाव की तैयारी को गंभीरता से नहीं लेते, तो इसका सीधा असर शासन की गुणवत्ता पर पड़ता है। “अगर प्रबंधन का यही स्तर है, तो सत्ता में आने के बाद जनता के प्रबंधन की क्या उम्मीद की जा सकती है?” मिश्रा ने कहा कि यह केवल अनैतिकता का मामला नहीं है, बल्कि प्रबंधन की विफलता का भी संकेत है। “ऐसे लोगों के हाथ में हमारी पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था का संचालन है, यह सोचकर ही घबराहट होती है। राजनीति में नैतिकता सिर्फ भाषण का विषय बनकर रह गई है, जबकि संगठनात्मक क्षमता का अभाव लोकतंत्र की जड़ें कमजोर कर रहा है।”