न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार की राजनीति में महिला मतदाताओं की भूमिका लगातार निर्णायक होती जा रही है। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक (59.7%) रहा। एनडीए को मिली जीत में भी महिला वोटिंग पैटर्न का बड़ा असर देखा गया। 243 विधानसभा क्षेत्रों में से 167 सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया और इनमें से 90 सीटों पर महिला वोटों का रुझान चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाला साबित हुआ। स्पष्ट है कि जिस भी दल ने महिलाओं का विश्वास जीता, उसे राजनीतिक बढ़त हासिल हुई। यही कारण है कि चुनाव की अधिसूचना से ठीक पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं को साधने के लिए बड़ा ऐलान किया है।
नया मास्टर स्ट्रोक : 2 लाख तक की मदद
नीतीश सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला स्व–रोज़गार योजना’ के तहत महिलाओं को स्वरोज़गार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया है।
प्रत्येक लाभार्थी महिला को 2 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
पहली किस्त 10,000 रुपये की होगी, जो सितंबर 2025 से जारी की जाएगी।
छह महीने के भीतर बेहतर काम करने वाली महिलाओं को अतिरिक्त सहयोग मिलेगा।
हाट–बाजार विकसित कर महिलाओं के उत्पादों के विपणन की सुविधा दी जाएगी।
सरकार का तर्क है कि यह कदम महिलाओं को घर–परिवार की सीमाओं से आगे निकालकर उन्हें उद्यमिता और स्वरोज़गार की दिशा में ले जाएगा।
चुनावी रणनीति के नज़रिए से
यह योजना चुनावी ऐलान नहीं कही जा सकती क्योंकि इसे कैबिनेट से मंज़ूरी देकर सीधे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन राजनीतिक नज़रिए से देखें तो यह स्पष्ट है कि सरकार महिला वोट बैंक को और मज़बूत करना चाहती है। 2020 में महिला मतदाताओं ने नीतीश–मोदी गठबंधन को निर्णायक समर्थन दिया था। विपक्ष लगातार महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में महिला स्वरोज़गार योजना उस नैरेटिव को काटने का काम करेगी। नीतीश कुमार का यह कदम ‘महिला सशक्तिकरण’ की उनकी पुरानी छवि (साइकिल योजना, छात्रवृत्ति योजना, आरक्षण में हिस्सेदारी) को एक बार फिर ताजा करता है।
नीतीश कुमार का यह कदम चुनाव से पूर्व राजनीति का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। महिला मतदाताओं का झुकाव किस ओर जाएगा, यह काफी हद तक इस योजना की सफलता और उसके लाभार्थियों तक पहुँच पर निर्भर करेगा।
लेकिन इतना तय है कि आने वाले विधानसभा चुनाव 2025 में महिला मतदाता ही सबसे बड़ा राजनीतिक समीकरण तय करेंगी।


























