न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में 18 वर्षों से लंबित लाइब्रेरियन बहाली और लाइब्रेरी एलिजिबिलिटी टेस्ट (LET) का नोटिफिकेशन जारी करने की मांग को लेकर सोमवार को ऑल बिहार ट्रेड लाइब्रेरियन एसोसिएशन के बैनर तले राज्य स्तरीय आंदोलन हुआ। आंदोलन की शुरुआत पटना विश्वविद्यालय सेंट्रल लाइब्रेरी से हुई और जुलूस कारगिल चौक तक पहुंचा। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई और करीब दो घंटे तक कारगिल चौक जाम रहा।
प्रशासन की पहल पर आंदोलनकारियों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक अजय यादव से कराई गई। प्रतिनिधियों ने मांग पत्र सौंपा, जिस पर निदेशक ने 10 दिनों बाद पुनः वार्ता का आश्वासन दिया।
प्रदेश अध्यक्ष विकास चंद्र सिंह और जिला अध्यक्ष सौरभ सुमन ने कहा कि राज्य में 5 लाख से अधिक लाइब्रेरी साइंस के छात्र बहाली का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन विभाग विधानसभा में हर बार टालमटोल वाला जवाब देकर छात्रों को गुमराह कर रहा है। 2008 की नियमावली साफ कहती है कि जहां 500 से अधिक किताबें होंगी, वहां लाइब्रेरियन की नियुक्ति अनिवार्य है, लेकिन सरकार नियमों को ताक पर रखकर शिक्षा व्यवस्था चला रही है।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा कि राज्य के 6421 उच्च विद्यालयों में, पूर्व से रिक्त पदों को मिलाकर लगभग 10 हजार लाइब्रेरियन पदों पर बहाली तत्काल शुरू की जाए। साथ ही विश्वविद्यालय, कॉलेज, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी पद स्वीकृत होने के बावजूद विभाग अब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं कर रहा है।
नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर चुनाव से पहले सरकार बहाली प्रक्रिया पूरी नहीं करती है, तो इसका खामियाजा उसे 5 लाख से अधिक वोटों के नुकसान के रूप में भुगतना पड़ेगा।

इस आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे प्लेटफॉर्म कोचिंग के संचालक नवीन कुमार सिंह और शिक्षक अभिमन्यु ने भी सरकार पर सवाल उठाए। छात्र नेताओं ने ऐलान किया कि अगर बीपीएससी-4 के तहत लाइब्रेरियन बहाली प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं होती, तो बिहार बंद का आह्वान किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं ने जोरदार नारेबाजी की—“LET एग्जाम नहीं तो वोट नहीं”। आंदोलन में पूरे बिहार से बड़ी संख्या में लाइब्रेरी साइंस छात्र जुटे और इसे ऐतिहासिक बनाने में योगदान दिया।


























