- पूजा स्पेशल ट्रेनों को ललितग्राम तक बढ़ाने की उठी जोरदार मांग
न्यूज़ स्कैन ब्यूरो, सुपौल
सुपौल जिला आज भी रेलवे की मुख्यधारा से उपेक्षित है। 33 लाख से अधिक की आबादी और सामरिक दृष्टि से बेहद अहम होने के बावजूद यहां एक भी लंबी दूरी की सुपरफास्ट या एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन नहीं हो पा रहा है।
त्योहारों पर घर लौटने वाले प्रवासी मजदूरों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से चलने वाली पूजा स्पेशल ट्रेनें केवल सहरसा या दरभंगा तक ही आती हैं। यदि इन ट्रेनों को ललितग्राम तक बढ़ा दिया जाए तो सुपौल और पूरे कोसी-सीमांचल की जनता को सीधी सुविधा मिल सकती है।
रेल संघर्ष समिति के संयोजक पवन कुमार अग्रवाल ने रेल मंत्री से गुहार लगाते हुए कहा—“बिहार के दूसरे जिलों को सुपरफास्ट और एक्सप्रेस की सुविधा है, लेकिन सुपौल जैसे बड़े जिले को अब भी सौतेला व्यवहार झेलना पड़ रहा है। जब देश में वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें चल रही हैं, तब सुपौल आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है।”
नई घोषणा पर भी अधूरी खुशी
हाल ही में रेलवे ने अमृतसर–सहरसा (04618/17) और सरहिंद–सहरसा (04508/07) द्विसाप्ताहिक स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है, जो सितंबर के अंत से चलेंगी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक इन ट्रेनों का संचालन ललितग्राम तक नहीं बढ़ेगा, तब तक सुपौलवासियों को असली लाभ नहीं मिलेगा।
सामरिक दृष्टि से भी अहम
सुपौल नेपाल सीमा से सटा जिला है। यहां सैनिकों का लगातार आना-जाना रहता है। रेलवे नेटवर्क का विस्तार न केवल आम जनता की सुविधा के लिए जरूरी है, बल्कि यह राष्ट्र की सामरिक मजबूती के लिहाज से भी बेहद आवश्यक है।
जनता का सवाल—कब मिलेगा हक़?
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं—जब छोटे जिलों तक सुपरफास्ट और वंदे भारत ट्रेनें पहुंच चुकी हैं, तो सुपौल क्यों उपेक्षित है? क्या 33 लाख की आबादी वाला यह बड़ा जिला रेलवे के नक्शे पर सिर्फ नाम भर रहेगा? क्या केंद्र और रेलवे मंत्रालय को कोसी-सीमांचल की जनता की पीड़ा सुनाई नहीं देती? लोगों का साफ कहना है कि पूजा स्पेशल और नई घोषित ट्रेनों को हर हाल में ललितग्राम तक बढ़ाया जाए। तभी सुपौल सच्चे मायनों में रेलवे विकास की धारा से जुड़ पाएगा।



























