न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनावी माहौल के बीच एक बड़ा दांव चल दिया है। शिक्षा विभाग में कार्यरत तीन वर्गों, मिड-डे मील रसोइया, रात्रि प्रहरी और शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों के मानदेय को दोगुना करने की घोषणा की गई है। यह निर्णय न सिर्फ इन कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि सियासी नजरिए से भी इसे बड़ा ‘गेमचेंजर’ माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने 1 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाई है और अब उनका आर्थिक सम्मान भी बढ़ाया जाना जरूरी था। मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा है कि “नवंबर 2005 में हमारी सरकार बनने के बाद हमने शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। तब बजट मात्र 4366 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 77,690 करोड़ रुपये हो गया है।” उन्होंने आगे कहा कि इस दौरान राज्य में शिक्षकों की नियुक्ति, नए स्कूलों का निर्माण और आधारभूत ढांचे के विकास जैसे कई कार्य किए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार के सामाजिक समीकरणों को मजबूत कर सकता है। खासकर ग्रामीण और गरीब तबकों में काम करने वाले समूहों के बीच यह नीतीश के आधार को और मजबूत करेगा।
बिहार में नीतीश कुमार का चुनावी मास्टरस्ट्रोक : रसोइयों, रात्रि प्रहरियों और शारीरिक शिक्षा अनुदेशकों की सैलरी दोगुनी


























