न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
उच्च शिक्षा के सपने देखने वाले बिहार के छात्रों के लिए एक राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ के दायरे को और अधिक विस्तार देते हुए अब छात्रों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण देने की तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में वित्त विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है और कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।
अब सिर्फ इंजीनियरिंग-एमबीबीएस ही नहीं, होटल मैनेजमेंट और स्किल कोर्स के लिए भी मिलेगा ऋण
पहले यह योजना मुख्य रूप से इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट जैसे पारंपरिक उच्च शिक्षा कोर्सों तक सीमित थी। लेकिन अब इसमें होटल मैनेजमेंट, स्किल डेवेलपमेंट, डिप्लोमा और वोकेशनल कोर्स भी शामिल किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य उन छात्रों को भी सपोर्ट देना है जो नौकरी परक या व्यावसायिक शिक्षा की ओर अग्रसर हैं।
क्यों है यह योजना खास?
अधिकतम ऋण सीमा: अब तक इस योजना के तहत छात्रों को अधिकतम 4 लाख रुपये का ऋण मिलता था। नए प्रस्ताव में यह सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये की जा रही है, विशेषकर MBBS और इंजीनियरिंग जैसे महंगे कोर्सों के लिए।
सरकारी और निजी संस्थानों दोनों पर लागू: यह ऋण सरकारी संस्थानों के साथ-साथ UGC/AICTE/NMC से मान्यता प्राप्त निजी संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों को भी मिलेगा।
आसान प्रक्रिया: छात्रों को बैंक की जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। शिक्षा विभाग की अनुशंसा के आधार पर ऋण मिलेगा।
ब्याज और भुगतान: राज्य सरकार पढ़ाई के दौरान ब्याज दर वहन करती है और पढ़ाई पूरी होने के बाद छात्रों को आसान किश्तों में भुगतान का विकल्प दिया जाता है।
योजना से जुड़ी प्रमुख बातें
योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2016 को हुई थी।
अब तक राज्य के 4 लाख से अधिक छात्र इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं।
महिला और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।
योजना को लागू करने वाली प्रमुख संस्था: बिहार शिक्षा वित्त निगम (BEFC)।
नए बदलाव से क्या होगा फायदा?
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, MBBS और इंजीनियरिंग जैसे कोर्सों की फीस में भारी वृद्धि के कारण छात्र आर्थिक संकट में आ जाते हैं। सरकार द्वारा ऋण सीमा को 10 लाख रुपये तक बढ़ाना इस दिशा में एक साहसिक कदम माना जा रहा है। इस फैसले से बिहार के हजारों छात्र-छात्राओं को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी और उन्हें पैसे की चिंता से मुक्ति मिलेगी। यह राज्य में ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के युवाओं के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।


























